24 फरवरी 2026ः हरियाणा में पानीपत स्थित इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (IOCL) की रिफाइनरी में कार्यरत हजारों मजदूर हड़ताल पर हैं। 23 फरवरी को सुबह 11 बजे से 30 से 40 हजार की संख्या में मजदूरों ने रिफाइनरी गेट 1 और 4 पर प्रदर्शन शुरू किया था, जिसके कुछ घंटे बाद ही पुलिस की तरफ से प्रदर्शन को जबरन समाप्त कराने के लिए लाठीचार्ज शुरू कर दिया गया जिसमें कुछ मजदूर घायल भी हुए। इसके बाद हालात पर काबू पाने के लिए सीआईएसएफ द्वारा हवाई फायरिंग करने की भी खबर आई है। मजदूरों के शांतिपूर्ण और जायज प्रदर्शन पर प्रबंधन व ठेकेदारों के इशारों पर दमन कर माहौल को तनावपूर्ण बना देने के लिए यहां सीआईएसएफ जिम्मेदार है।
मजदूरों का कहना है कि देश के सबसे बड़े सार्वजनिक उपक्रमों में से एक के कर्मचारी होने के बावजूद उनकी कार्य परिस्थितियां बेहद दयनीय हैं। 12-12 घंटे काम करने के बाद भी वेतन 8 घंटे का ही दिया जाता है, यानी ओवरटाइम का कोई पैसा नहीं दिया जाता। महीने में बस 2 दिन की ही छुट्टी निर्धारित है, बाकी 2 रविवार के दिन भी काम करना होता है। वेतन भुगतान करने में अक्सर देरी की जाती है। PF कटौती में प्रबंधन व ठेकेदारों द्वारा धांधली की जाती है, कार्यस्थल पर शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी व्यवस्था नहीं है। 8 घंटे काम, ओवरटाइम, नियमित वेतन भुगतान और कार्यस्थल पर शौचालय, पेयजल, कैन्टीन आदि बुनियादी सुविधाएं बहाल करने की मजदूरों की प्रमुख मांगे हैं।
मजदूरों के संगठित प्रतिरोध और गुस्से से तत्काल पीछे हटे प्रशासन, प्रबंधन व ठेकेदारों ने उनके गुस्से को शांत करने और ठीक-ठीक कहें तो उनके संघर्ष को बिखेर देने के मकसद से उनके सामने एक लिखित परंतु अस्पष्ट आश्वासन भी पेश किया है जिसमें उनकी मांगों को सही कहते हुए भी उन्हें सीधे-सीधे लागू करने के बजाए प्व्ब्स् अधिकारियों को सूचित करने की बात की गई है। मजदूर इसमें फंसे बिना अपनी मांगों के पूरा होने तक हड़ताल और प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय ले चुके हैं, और अपने संघर्ष को संगठित रूप देने हेतु अगुआ मजदूरों की कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
24 फरवरी को मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) की एक टीम ने तथ्यान्वेषण व संघर्षरत मजदूरों से संवाद करने हेतु रिफाइनरी परिसर का दौरा किया। इस तथ्यान्वेषण में कुछ नए तथ्य जो पता लगे वो ये कि 23 फरवरी को मजदूरों का उपरोक्त विद्रोह फूटने का मुख्य उत्प्रेरक था 2 दिन पहले रिफाइनरी में हुए एक कार्य संबंधित हादसे में 2 मजदूरों की मृत्यु और 1 का बुरी तरह घायल हो जाना (एक पैर घुटने तक कट जाना), और इस पर भी प्रबंधन का उदासीन रवैया। सालों से शोषण और प्रबंधन-ठेकेदारों का अभद्र व्यवहार झेल रहे मजदूरों का दबा हुआ गुस्सा इस हृदयविदारक घटनाक्रम से फूट पड़ा। 21 फरवरी को ज्ञज्ञै कान्ट्रेक्टर के मजदूर चेन पुलिंग के द्वारा पाइपों को ऊपर ले जा रहे थे। इसी दौरान चेन पुलिंग का लॉक हट गया और पाइप मजदूरों के ऊपर गिरे। उनमें से एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई और दो मजदूर घायल हो गए। जिसमें से एक गंभीर रूप से घायल हुआ जिसकी बाद में मौत हो गई। इस दुर्घटना पर मौके पर उपस्थित कान्ट्रेक्टर के सुपरवाइजर ने बहुत ही उदासीनता दिखाई जो मजदूरों के लिए बहुत ही अपमानजनक थी। मौके पर तुरंत एंबुलेंस का प्रबंध नहीं किया गया और अन्य किसी गाड़ी से घायल मजदूरों को अस्पताल पहुंचाया गया। बाद में भी मजदूरों के बारे में प्रबंधन व ठेकेदारों द्वारा कोई सूचना नहीं दी गई। इस घटना ने लंबे समय से मजदूरों की बुरी कार्य परिस्थितियों के खिलाफ पैदा हो रहे आक्रोश में चिंगारी का काम किया।
गौरतलब है कि सम्पूर्ण परिसर में, विशेषतः मजदूरों के प्रदर्शन स्थल पर, मोबाईल नेटवर्क और इंटरनेट सेवा को बंद करने के लिए जैमर लगा दिए गए हैं ताकि संघर्ष और दमन दोनों की खबरें बाहर न पहुंच सकें। गौरतलब है कि पुलिस प्रशासन 2500 अज्ञात मजदूरों के नाम से एफआईआर भी दर्ज कर चुका है, वहीं प्रबंधन व ठेकेदारों पर श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करने व प्रशासन द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर लाठीचार्ज करने के लिए कोई एफआईआर या न्यूनतम कानूनी कार्रवाई भी नहीं हुई है।
24 फरवरी को भी मजदूरों ने अपनी एकता कायम रखी और हड़ताल जारी रही। इस बीच दिल्ली और हरियाणा के कई मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि मजदूरों के बीच में पहुंचे और उन्हें अपना समर्थन दिया और मजदूरों के इस बहादुराना साहस व संघर्ष को लाल सलाम पेश किया। उन्होंने मजदूरों को लड़ाई को जारी रखने और लड़ाई में साथ देने का वादा किया।
शाम होते-होते लार्सन एण्ड टुब्रो जो यहां पर सबसे बड़ा ठेकेदार है, उसने अपने लेटर हेड में मजदूरों की मांगों से सहमति जताते हुए मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। पुलिस प्रशासन भी अपनी पीठ खुद ही थपथपाने लगा कि उसने समझौता करवा दिया और प्रचारित-प्रसारित किया गया कि समझौता हो गया, हड़ताल खत्म हो गई और कल से मजदूर काम पर वापस लौटेंगे पर मजदूरों ने इस अस्पष्ट समझौते को ठुकरा दिया। मजदूरों का कहना था कि आइओसीएल प्रशासन हमें अपने लेटर हेड में लिख कर दे और हमें आश्वासन दे कि इन मांगों को लागू किया जाएगा।
25 फरवरी को मजदूर सुबह से ही तीन और चार नंबर गेट के बाहर इकट्ठा हो गए और रास्ता जाम कर दिया। उनके साथ मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस बीच एक बार फिर पुलिस और मजदूरों के बीच टकराहट हुई और पुलिस ने मजदूरों के ऊपर बल प्रयोग किया जिसमें कुछ मजदूरों को चोटें आईं, पर मजदूरों ने अपनी एकता का परिचय दिया और हड़ताल जारी रखी।
दिन भर मजदूर प्रतिनिधियों से बातचीत व समझौते की बात होती रही। शाम को आइओसीएल ने अपने लेटर हेड में मजदूरों की मांगों को सही बताते हुए ठेकेदारों को इन मांगों को लागू करने का निर्णय दिया। मजदूरों की मांगों के अनुसार बड़े-बड़े बोर्ड में इन लेटर हेड को लगाया गया। और एक बार फिर हड़ताल समाप्त होने और समझौता हो जाने की बातें की गईं।
पर प्रबंधन ने एक बार फिर मजदूरों के साथ धोखा किया। प्रबंधन ने जो वेतन की दर लिस्ट में लगाई वह बहुत ही कम थी। इस बात को लेकर मजदूरों के बीच काफी आक्रोश था और मजदूरों ने इसे मानने से मना कर दिया।
एक बार फिर आशंका बनी रही कि क्या कल भी हड़ताल जारी रहेगी। मजदूरों ने एक बार फिर साहस का परिचय दिया और अपनी एकता प्रदर्शित की। 26 फरवरी की सुबह हजारों की संख्या में मजदूर गेटों में इकट्ठा हो गए। गेट पर सभा को संबोधित करते हुए मजदूरों को बताया गया कि पानीपत रिफाइनरी ए श्रेणी में आती है परंतु आइओसीएल ने इसे सी श्रेणी में डाल दिया है जिससे मजदूरों का वेतन कम हो जाएगा। मजदूरों की एकता के सामने आइओसीएल के प्रबंधन को झुकना पड़ा और उसने केंद्रीय श्रम अधिकारी की मध्यस्थता में पांच मजदूर प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की।
समझौता वार्ता में आइओसीएल प्रबंधन मजदूर को ए श्रेणी की जगह सी श्रेणी में ही रखने के लिए अड़ा रहा। जिसे मजदूर प्रतिनिधि और मजदूर मानने के लिए तैयार नहीं थे और शाम होते-होते बातचीत बेनतीजा रही। पर इस हड़ताल ने मजदूरों के हौंसलों को दिखा दिया है कि जब मजदूर अपने अधिकारों के लिए लड़ता है तो वह अपनी एकता को हासिल करता है।
पानीपत की यह रिफाइनरी 1998 से क्रियाशील है जिसमें विभिन्न इकाइयों में 50 हजार से अधिक मजदूर कार्यरत हैं। यह दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी इंटिग्रेटेड रिफाइनरियों में से एक है। इसके बावजूद इन हजारों मजदूरों में से अधिकतर विभिन्न ठेकेदारों के तहत काम करते हैं और स्थाई नौकरी तथा बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित हैं। आज प्राइवेट सेक्टर ही नहीं, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी कंपनियों में भी ठेका प्रणाली रोजगार की प्रमुख व्यवस्था बन गई है, जो मजदूरों के बुनियादी अधिकारों को निरस्त कर उनके शोषण को और भी तीव्र बना देती है।
सभी केन्द्रीय श्रम कानूनों को ध्वस्त कर मोदी सरकार द्वारा पिछले साल लागू किए गए 4 नए लेबर कोड इस ठेका प्रणाली और इसके और भी खतरनाक रूप ‘फिक्स टर्म रोजगार’ को सभी क्षेत्रों में सर्वव्यापी बना देते हैं जिससे स्थाई रोजगार, 8 घंटे काम, ओवरटाइम, च्थ् जैसे सारे बुनियादी अधिकार, जो मजदूर वर्ग ने अपने बलिदानी संघर्षों से हासिल किए थे, एक झटके में खत्म हो चुके हैं। यही नहीं, यूनियन बनाना और हड़ताल करना भी लगभग असंभव व जुर्म के बराबर बना दिया गया है। पानीपत रिफाइनरी में मजदूरों की हड़ताल असल में तीव्र शोषण और गुलामी की इस नई घोर मजदूर-विरोधी प्रणाली का ही नतीजा है जिसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए मजदूर वर्ग को जाति-धर्म-भाषा आदि के विभाजनकारी षड्यंत्रों में बिना फंसे वर्गीय एकता बनानी होगी।
IOCL रिफाइनरी, पानीपत के संघर्षरत मजदूरों की बिंदुवार मांगें इस प्रकार हैं-
1. 8 घंटे की ड्यूटी सख्ती से लागू की जाए।
2. वेतन का भुगतान प्रत्येक माह की 1 से 7 तारीख के बीच सुनिश्चित किया जाए तथा 240 दिन पूर्ण करने पर पूरी देय राशि का भुगतान किया जाए।
3. कंपनी के बोर्ड रेट के अनुसार वेतन दिया जाए तथा भविष्य निधि (PF) की राशि बराबर और नियमित रूप से जमा की जाए।
4. कार्य के दौरान किसी भी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में कंपनी पूर्ण जिम्मेदारी ले और उचित मुआवज़ा दे।
5. के.के.एस. से उठाए गए मजदूर साथियों को तुरंत रिहा किया जाए।
6. ओवरटाइम (OT) का भुगतान दोगुनी दर से किया जाए।
7. सभी राष्ट्रीय अवकाश मजदूरों को प्रदान किए जाएं।
8. मासिक ड्यूटी 26 कार्यदिवस निर्धारित की जाए।
9. कार्यस्थल पर शौचालय और स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।
10. मजदूरों पर दर्ज की गई एफआईआर रद्द की जाए। -हरियाणा संवाददाता
पानीपत रिफाइनरी के बाद अब सूरत स्टील प्लांट में मजदूरों ने संघर्ष छेड़ा
सूरत में मित्तल-निपान स्टील प्लांट में लार्सन एण्ड टुब्रो के 2000 ठेका मजदूरों ने कम वेतन, अत्यधिक काम के घंटे और खराब कार्य स्थितियों के खिलाफ 26 फरवरी को काम छोड़ कर संघर्ष का आरंभ किया। पुलिस ने संघर्ष को कुचलने के लिए 35 आंसू गैस के गोले दागे और 20 मजदूरों को गिरफ्तार किया।
बातचीत में मजदूरों ने बताया कि पानीपत रिफाइनरी के मजदूरों के संघर्ष की खबरें और वीडियो देख कर वो खुद अपनी जायज मांगों पर संघर्ष करने के लिए प्रेरित हुए।
पानीपत रिफाइनरी के ठेका मजदूरों के संघर्ष ने मजदूर वर्ग के शोषण-उत्पीड़न पर टिके पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के असली चरित्र को पुनः बेनकाब करने और इसके गहराते व्यवस्थागत संकट के कारण तीव्र होते जा रहे हमलों के खिलाफ नए संघर्षों व विस्फोटों की जमीन को और उर्वर बनाने का काम किया है।