मजदूर विरोधी 4 नये लेबर कोड्स के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा 12 फरवरी को आहूत देशव्यापी आम हड़ताल में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) से जुड़े घटक संगठनों, विभिन्न मजदूर संगठनों, फैक्टरी यूनियनों, साझा मोर्चों, स्कीम वर्कर्स (आशा-आंगनबाड़ी- भोजनमाताओं) की यूनियनों एवं सामाजिक, महिला व छात्र संगठनों इत्यादि ने बढ़कर भागीदारी की; और चारों नये लेबर कोड्स को तत्काल वापस लेने की मांग की।
राजधानी दिल्ली में ‘‘जन अभियान दिल्ली’’ के बैनर तले जंतर-मंतर पर संयुक्त विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया; तदुपरान्त राष्ट्रपति को एक ज्ञापन प्रेषित कर इन लेबर कोड्स को मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज बताया गया एवं न्यूनतम वेतन 30 हजार रु. प्रतिमाह घोषित करने की मांग की गई।
गुड़गांव में ट्रेड यूनियन काउंसिल के बैनर तले लघु सचिवालय पर जुलूस निकालकर संयुक्त विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों के ट्रेड यूनियन अधिकारों और हड़ताल के संवैधानिक अधिकार पर हमला बोलने वाले इन लेबर कोड्स के विरुद्ध मजदूरों को एक वर्ग के रूप में एकजुट होना होगा।
फरीदाबाद में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा लघु सचिवालय पर जुलूस निकालकर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया; तदुपरान्त राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर महिला मजदूरों से रात की पाली में काम कराने का अधिकार पूंजीपतियों को देने वाले नये लेबर कोड्स की कड़ी भर्त्सना की गई।
देहरादून में मजदूर संघर्ष संगठन द्वारा विरोध-प्रदर्शन के साथ राष्ट्रपति को एक ज्ञापन ज्ञापन प्रेषित कर ‘‘हायर एंड फायर’’ को बढ़ावा देने और यूनियनों की सामूहिक सौदेबाजे की ताकत को कमजोर करने वाले इन लेबर कोड्स को तत्काल रद्द करने की मांग की गई।
हरिद्वार में संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के बैनर तले हुये संयुक्त विरोध-प्रदर्शन के तहत श्रम विभाग तक रैली निकाली गई; तदुपरान्त राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन में लेबर कोड्स रद्द करने की मांग की गई और सिडकुल के उद्यमों में मजदूरों के शोषण व श्रम कानूनों के घोर उल्लंघन को मुद्दा बनाया गया।
काशीपुर में इंकलाबी मजदूर केंद्र ने नये लेबर कोड्स का पुतला फूंका, जिसमें प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले भोजनमाताओं ने बढ़कर भागीदारी की। विरोध-प्रदर्शन में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन व प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी शामिल रहीं।
रामनगर में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा सभा कर और नगर में जुलूस निकालकर भोजनमाताओं के अमानवीय शोषण को मुद्दा बनाया और मजदूर विरोधी लेबर कोड्स रद्द करने की मांग की। विरोध-प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी एवं प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की।
कालाढूंगी में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा तहसील में विरोध-प्रदर्शन किया गया; तदुपरांत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में भोजनमाताओं का मानदेय बढ़ाने की मांग की गई। विरोध-प्रदर्शन में क्रांतिकारी किसान मंच और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की।
हल्द्वानी में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा उप जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध-प्रदर्शन के साथ अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेषित किया गया; तदुपरांत बुद्ध पार्क पहुंचकर 4 नये लेबर कोड्स के विरुद्ध आयोजित देशव्यापी आम हड़ताल का समर्थन किया।
रुद्रपुर में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों, फैक्टरी यूनियनों एवं आशा वर्कर्स व भोजनमाताओं ने विशाल विरोध-प्रदर्शन कर मजदूर विरोधी लेबर कोड्स रद्द करने की मांग बुलंद की। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार न सिर्फ मजदूरों को नई गुलामी में धकेल रही है अपितु अन्नदाता किसानों को भी बर्बाद कर रही है। वक्ताओं ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील की भी कड़ी भर्त्सना की।
लालकुआं में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा विरोध-प्रदर्शन कर आम हड़ताल का समर्थन किया गया।
मेरठ में मजदूर संघर्ष संगठन द्वारा विरोध-प्रदर्शन के साथ राष्ट्रपति को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया और मोदी सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की।कार्यक्रम में किसान एकता केंद्र से जुड़े लोगों ने भी भागीदारी की।
बरेली में बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन के बैनर तले संयुक्त विरोध-प्रदर्शन किया गया, जिसमें इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच एवं बैंक एम्प्लॉयीज यूनियन से जुड़े लोगों ने भी भागीदारी की। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि नये लेबर कोड्स देशी-विदेशी पूंजीपतियों की मांग पर लाये गये हैं।
मऊ में जिला श्रमिक समन्वय समिति के बैनर तले कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला गया जिसमें विभिन्न मजदूर-किसान संगठनों एवं सामाजिक संगठनों ने भागीदारी की। इस दौरान राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर नये लेबर कोड्स को पूंजीपरस्त बताया गया और बिजली विभाग के निजीकरण व ठेकेदारी प्रथा को रद्द करने की मांग की गई।
बिहार के रोहतास जिले में ग्रामीण मजदूर यूनियन द्वारा विरोध-प्रदर्शन किया गया एवं पटना में इफ्टू (सर्वहारा), ग्रामीण मजदूर यूनियन और बिहार निर्माण व असंगठित मजदूर यूनियन द्वारा संयुक्त विरोध-प्रदर्शन आयोजित कर नये लेबर कोड्स और मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की।
हरियाणा के करनाल में जन संघर्ष मंच, निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन एवं मनरेगा मजदूर यूनियन द्वारा विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें किसान व कर्मचारी संगठनों से जुड़े लोगों ने भी भागीदारी की। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध देशव्यापी एकजुटता का आह्वान किया। -विशेष संवाददाता