गोरखपुर में ट्रेनी महिला सिपाहियों का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 23 जुलाई (बुधवार) की सुबह ट्रेनिंग के लिए आयी करीब 600 महिला सिपाहियों ने जमकर हंगामा किया। उनके द्वारा ऐसा करने की वजह ट्रेनिंग सेंटर में न क
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 23 जुलाई (बुधवार) की सुबह ट्रेनिंग के लिए आयी करीब 600 महिला सिपाहियों ने जमकर हंगामा किया। उनके द्वारा ऐसा करने की वजह ट्रेनिंग सेंटर में न क
केन्द्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा आहूत आम हड़ताल 9 जुलाई को सफल हो गई। इस हड़ताल में केन्द्रीय फेडरेशनों ने करोड़ों मजदूरों की भागीदारी का दावा कर हड़ताल को सफल घोषित क
ग्रीस के श्रम मंत्रालय ने मजदूरों के काम के घंटे प्रति दिन 13 किये जाने के सम्बन्ध में एक नियम पारित करने का तय किया है। इस नियम के अनुसार अब मजदूर एक ही नियोक्ता के अधीन
देश में हो रहे तथाकथित ‘‘विकास’’ की सबसे बड़ी कीमत देश के मजदूरों-मेहनतकशों को चुकानी पड़ती है। दिल्ली में फरवरी 2025 में बीजेपी की सरकार बनी उसके बाद दिल्ली में डबल इंजन क
केन्या में ऐतिहासिक वित्त विधेयक विरोधी प्रदर्शनों की पहली वर्षगांठ के अवसर पर पूरे देश में जगह-जगह 25 जून को प्रदर्शन आयोजित किये गये, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के
मजदूर वर्ग आबादी में भारत का सबसे बड़ा वर्ग है। पर भारत की राजनीति में इसके मुद्दे इसकी मांगें इसकी भारी आबादी के सापेक्ष कहीं नजर नहीं आते। धर्म-जाति-क्षेत्र के मुद्दे कह
आजकल स्पेन में हजारों धातु मजदूर आंदोलनरत हैं। कहीं धातु मजदूर हड़ताल पर हैं तो कहीं हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। धातु मजदूरों की यूनियन मजदूरों के संघर्ष को रोकने,
आंध्र प्रदेश की चंद्र बाबू नायडू सरकार प्रदेश में निवेश जुटाने और पूंजीपतियों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसी कड़ी में उसने प्राइवेट सेक्टर में मजदू
भारत सरकार ने वर्ष 2025 के लिए सात लोगों को पद्म विभूषण देने का एलान किया है। इन सात लोगों में सुजुकी मोटर कम्पनी के पूर्व चेयरमैन ओसामू सुजुकी का भी नाम है। राष्ट्रपति द
ब्रिटेन की गारमेंट कम्पनी नेक्स्ट ने श्रीलंका में स्थित एक प्लांट को बंद करने का फैसला किया है। इस प्लांट के बंद होने से लगभग 1500 मज़दूर बेरोजगार हो जाएंगे। यह प्लांट कटु
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।