बसीरत
सुलेमान जब पहली बार इस फैक्टरी में आया तब महज 15 साल का था। पिता खरात मशीन कारीगर। स्वभाव से शुष्क और निर्दयी।। अक्सर छोटे-मोटे कामों के लिए कंपनी बुला लेती और काम के एवज
सुलेमान जब पहली बार इस फैक्टरी में आया तब महज 15 साल का था। पिता खरात मशीन कारीगर। स्वभाव से शुष्क और निर्दयी।। अक्सर छोटे-मोटे कामों के लिए कंपनी बुला लेती और काम के एवज
भारत में दहेज प्रथा केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं की जान लेने वाली एक संगठित हिंसा बन चुकी है। हर वर्ष अनेक महिलाएं शादी के बाद मानसिक और शारीरिक प्रता
दिल्ली/ 24 मई 2026 को मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा दिल्ली के राजेंद्र भवन में ‘मजदूर आंदोलन का मौजूदा उभार और बढ़ता दमन चक्र’ विषय पर कन्वेंशन
हरिद्वार/ हरिद्वार में मजदूरों के स्वतः स्फूर्त संघर्षों की बढ़ती के बीच जिला प्रशासन व पुलिस इन आंदोलनों को कुचलने पर उतारू है। इसी उद्देश्य से वह इन संघ
इंकलाबी मजदूर केन्द्र की बलिया इकाई के जुझारू कार्यकर्ता कामरेड अर्जुन प्रधान का गत 22 मई 2026 को देहान्त हो गया। गाजीपुर-बलिया की सीमा पर स्थित ग्राम कमसड़ी (बखरिय डीह) क
जैसा कि तय ही था कि जैसे ही पांच राज्यों में चुनाव निपटेंगे वैसे ही गैस, पेट्रोल-डीजल के दामों में आग लगेगी और महंगाई आसमान छूने लगेगी। मई माह के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल-डीजल सौ रुपये प्रति लीटर या उससे भी ज्यादा तक जा पहुंचे। बढ़ती महंगाई के बीच देश का आर्थिक संकट गहराता गया है और उसके साथ सामाजिक संकट भी गहरा रहा है। और इस गहराते सामाजिक संकट ने समाज के हर वर्ग और तबके को मजबूर कर दिया है कि वह अपनी प्रतिक्रिया दे।
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन का सिलसिला एक के बाद एक फैक्टरी में जारी है। इसी क्रम में 16 मई को सचेंडी स्थित आटो पार्ट्स कम्पनी स्पन माइक्रो
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।
जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।