विविध

छत्तीसगढ़, राजस्थान, म.प्र. - किसानों को उजाड़ती सरकार

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आजकल मोदी सरकार घमंड में चूर है। 2024 के आम चुनाव की बुरी गत से उबर कर वह अपने को अजेय समझने लगी है। इसीलिए वह मजदूरों-किसानों पर रोज नये-नये हमले बोलकर पूंजीपतियों का मु

जातिवाद पर चोट

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आज के समाज में जातिवाद की जड़ें गहरी मिट्टी में गड़ी हैं। इनकी जड़ों को समूल नष्ट करने के लिए कई समाज सुधारकों-क्रांतिकारियों-समाज सेवकों ने अपने सारे जीवन को लगा दिया पर जा

धर्मान्धता का शिकार नेपाली जन

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हिन्दू समाज महिलाओं-बच्चियों को देवी के रूप में आदि काल से पूजता आ रहा है। नेपाल में भी बड़ी संख्या में हिन्दू आबादी रहती है। यहां भी प्राचीन काल से हिन्दू देवी तलेजू के अ

भारत का संकट

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इस वर्ष हमारे देश में जो-जो कुछ घटा (भारत-पाकिस्तान युद्ध, कथित आतंकवादी घटनाएं, पंजाब व अन्य राज्यों में बाढ़ से तबाही, गिरता रुपया, बढ़ती जाती बेरोजगारी व महंगाई आदि) उसक

जी-20 शिखर सम्मेलन के राजनीतिक निहितार्थ

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ऐसी स्थिति में जहां अमरीकी साम्राज्यवादियों का अपने सहयोगी यूरोपीय साम्राज्यवादियों के साथ मतभेद व टकराव बढ़ रहे हों, अमरीका और रूस के बीच, अमरीका और चीन के बीच तथा चीन और भारत के बीच तरह-तरह के विवाद और टकराव बढ़ते जा रहे हों, वहां जी-20 की एक सकारात्मक मंच के बतौर न तो अब साम्राज्यवादियों के लिए कोई खास उपयोगिता रह गयी है और न ही दूसरे साम्राज्यवादी देशों- चीन और रूस- के लिए इसकी प्रभावशाली भूमिका बनने की संभावना है। 

बेल्जियम : कटौती कार्यक्रम के विरोध में हड़ताल

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बेल्जियम की एरिजोना सरकार मजदूर वर्ग पर नये हमले बोल रही है। एक ओर सरकार सैन्यीकरण पर खर्च बढ़ा रही है तो दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों के पेंशन, वेतन पर हमले के साथ सार्वज

एक बार फिर लोकतंत्र और भीड़तंत्र

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फासीवादी हमेशा से ही ‘महामानव’ और ‘लघु मानव’ में विश्वास करते रहे हैं। उनका नेता महामानव होता है और लघु मानवों की भीड़ को उसके पीछे चलना होता है। यदि नरेन्द्र मोदी खुद को अजैविक मानते हैं तथा उनके भक्त उन्हें अवतारी पुरुष मानते हैं तो यह अनायास नहीं है। यह फासीवादियों की आम दृष्टि के अनुरूप है। 

आतंकवाद के नाम पर मजदूरों को आतंकित करने की कोशिश

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दिल्ली लाल किले के पास विस्फोट और कश्मीर में हुई हालिया विस्फोट की घटना के बाद पूरे देश में आतंकवाद के नाम पर सरकार द्वारा आतंक कायम किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों के खिलाफ

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।