राजनीति

बांग्लादेश : हसीना सरीखे हश्र की ओर बढ़ती यूनुस सरकार

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शेख हसीना सरकार की रुखसती को अभी वर्ष भर भी पूरा नहीं हुआ है कि बांग्लादेश की सड़कें एक बार फिर से प्रदर्शनों की गवाह बन रही हैं। यूनुस सरकार के प्रति बांग्लादेश की जनता क

एक ठग और उसके ठगे हुए सगे

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‘‘ऐसा कोई सगा नहीं जिसे मैंने ठगा नहीं’’ यह संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का आप्त वाक्य है। या आप ये भी कह सकते हैं कि किसी भी धूर्त चालाक व्यापारी क

तुर्की में विरोधियों का दमन और विरोध प्रदर्शन

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तुर्की में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन उस समय शुरू हुए जब 19 मार्च को तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्ताम्बुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू की गिरफ्तारी हुई।

एक की दाढ़ी जली और दूसरों ने हाथ सेंके

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पिछले दिनों यूरोप में बहुत ठण्ड पड़ रही थी। यूरोप के नेताओं के हाथ मारे ठण्ड के झड़ने को तैयार थे। इतने में खबर फैली कि ट्रम्प ने जेलेन्स्की की दाढ़ी में आग लगा दी है। पहले

जर्मनी में ए एफ डी का उभार

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जर्मनी में हुए चुनाव में सभी पूंजीवादी पार्टियों ने अप्रवासियों के मुद्दे पर एक-दूसरे से प्रतियोगिता की। घोर दक्षिणपंथी पार्टी ए एफ डी (जर्मनी के लिए विकल्प) ने तो 2015 स

जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी उभार के मायने

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जर्मनी में हुए हालिया चुनाव में जहां दक्षिणपंथी पार्टी सीडीयू 28.5 प्रतिशत वोट पाकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई, वहीं विगत चुनाव में पांचवे नम्बर की पार्टी रही धुर

भाजपा का दोगलापन

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मुस्लिम विरोध भाजपा व आर एस एस की विचारधारा के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। सत्ता में आने के लिए व सत्ता में बने रहने के लिए वह मुस्लिम विरोध की राजनीति का इस्तेम

अप्रवासी मजदूर और पूंजीपति वर्ग

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सं.रा.अमेरिका में राष्ट्रपति की कुर्सी पर सवार होते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने अप्रवासी मजदूरों के खिलाफ वह अभियान छेड़ दिया जिसका उन्होंने चुनावों के दौरान दावा किया था या धमकी

कनाडा : जस्टिन ट्रूडो का इस्तीफा

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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 7 जनवरी को पद से इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे ही उनकी लिबरल पार्टी उनके उत्तराधिकारी का चयन

वेनेजुएला : निकोलस मदुरो फिर राष्ट्रपति बने

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10 जनवरी को वेनेजुएला के पुनः निर्वाचित हुए राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने फिर से राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली। इस बार के राष्ट्रपति चुनावों में भी अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।