दक्षिण कोरिया : राजनैतिक उठापटक जारी
3 दिसम्बर से दक्षिण कोरिया में शुरू हुई राजनैतिक उठा पटक थमने का नाम नहीं ले रही है। एक के बाद एक नाटकीय घटनाक्रम घटित हो रहे हैं। इस बीच मजदूर-मेहनतकश जनता लगातार सड़कों
3 दिसम्बर से दक्षिण कोरिया में शुरू हुई राजनैतिक उठा पटक थमने का नाम नहीं ले रही है। एक के बाद एक नाटकीय घटनाक्रम घटित हो रहे हैं। इस बीच मजदूर-मेहनतकश जनता लगातार सड़कों
जर्मनी में राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टीनमीयर ने देश की संसद को भंग कर दिया है। चांसलर ओलाफ स्कोल्ज की सरकार के हाल में संसद में विश्वास मत खो देने के बाद यह घोषणा की गयी
संयुक्त राज्य अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी को सत्तारूढ़ होने में मदद करने के बाद अब दुनिया के सबसे धनी आदमी यानी एलन मस्क अन्य देशों की धुर दक्षिणपंथी पा
फ्रांस के प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर को अपने खिलाफ संसद में लाये अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने पर इस्तीफा देना पड़ा है। वे महज तीन महीने पहले ही प्रधानमंत्री बनाये गये
दक्षिण कोरिया में 3 दिसम्बर की शाम राष्ट्रपति यून सोक योल ने अचानक मार्शल ला लगाये जाने की घोषणा कर दी। मार्शल लॉ के तहत सेना ने समस्त प्रशासन अपने हाथ में ले लिया। सेना
25-26 नवम्बर को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई के लिए राजधानी इस्लामाबाद में व्यापक प्रदर्शन हुए। पूरे देश खासकर खैबर पख्तुनबा प्रांत से आये प्रदर्शनक
ब्रिक्स+ के इस शिखर सम्मेलन से अधिक से अधिक यह उम्मीद की जा सकती है कि इसके प्रयासों की सफलता से अमरीकी साम्राज्यवादी कमजोर हो सकते हैं और दुनिया का शक्ति संतुलन बदलकर अन्य साम्राज्यवादी ताकतों- विशेष तौर पर चीन और रूस- के पक्ष में जा सकता है। लेकिन इसका भी रास्ता बड़ी टकराहटों और लड़ाईयों से होकर गुजरता है। अमरीकी साम्राज्यवादी अपने वर्चस्व को कायम रखने की पूरी कोशिश करेंगे। कोई भी शोषक वर्ग या आधिपत्यकारी ताकत इतिहास के मंच से अपने आप और चुपचाप नहीं हटती।
इन दिनों कोलम्बिया में कॉप-16 के नाम से जैव विविधता वार्ता चल रही है। 21 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक चलने वाली इस वार्ता में प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण की कसमें खायी जा रही है
पिछले वर्षों में चीन दुनिया की एक बड़ी साम्राज्यवादी शक्ति बन चुका है। यह दुनिया के ऊपर अपना एक दबदबा कायम कर चुका है और इसको और बढ़ाने के लिए यह प्रयासरत है। आज मुख्यतया आ
पिछले वर्षों में चीन दुनिया की एक बड़ी साम्राज्यवादी शक्ति बन चुका है। यह दुनिया के ऊपर अपना एक दबदबा कायम कर चुका है और इसको और बढ़ाने के लिए यह प्रयासरत है। आज मुख्यतया आ
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।