ईदगाह बचाने का संघर्ष

Published
Fri, 01/16/2026 - 08:18
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रुद्रपुर/ रुद्रपुर नगर निगम और प्रशासन द्वारा 7 दिसंबर 2025 को खेड़ा बस्ती स्थित ईदगाह के मैदान पर अन्यायपूर्ण तरीके से कब्जा कर लिया गया। नगर निगम द्वारा ऊंची-ऊंची दीवारें खड़ी कर ईदगाह को घेर लिया गया और ऐसा करने से पहले मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं वहां स्थित ईदगाह समेत मदरसे, मस्जिद, कब्रिस्तान, करबला और मजार आदि संस्थाओं के प्रमुखों से राय मशविरा तक नहीं किया गया। उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन और अन्याय है। 
    
नगर निगम के इस कदम के खिलाफ तत्काल ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया। 5 जनवरी 2026 को ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न सामाजिक संगठनों, मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा नगर निगम प्रशासन द्वारा जबरदस्ती किये कब्जे को तत्काल खत्म करके उक्त जमीन को मूल पक्षकारों को पुनः हस्तांरित और निःशुल्क आवंटित किये जाने की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया गया व जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन की प्रतियां अध्यक्ष राष्ट्रीय व राज्य अल्पसंख्यक आयोग, अध्यक्ष राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग, अध्यक्ष राष्ट्रीय व राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं महापौर (मेयर) व नगर आयुक्त नगर निगम, रुद्रपुर को भी प्रेषित की गईं। इसके पश्चात ईदगाह की जमीन पर कब्जा किये जाने के विरोध में और अंकिता भंडारी को न्याय दिये जाने हेतु हजारों की संख्या में लोगों ने गांधी पार्क में सामूहिक उपवास किया। 11 जनवरी को ‘‘ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति’’ द्वारा आयोजित इस सत्याग्रह में भारी संख्या में महिलाओं ने भागीदारी की।
    
गांधी पार्क की सभा में वक्ताओं ने कहा कि जिस जमीन को प्रशासन द्वारा कब्जे में लेकर सील किया गया है वहां पर बारात घर भी स्थित है। वहां स्थित स्कूल व मदरसा में पढ़ने वाले छात्रों और क्षेत्र के बच्चों का खेल का मैदान भी उसी ईदगाह का मैदान था, जो अब उनसे छिन गया है। अब कब्रिस्तान के लिए बहुत ही छोटी जगह छोड़ी गईं है, जिसमें दफनाये गये शव ताजे हैं। अब यहां के लोग नये शवों को दफनाने के लिए ताजी कब्रों को खोदने को मजबूर होंगे। ऐसे में कोरोना जैसी महामारी आने पर, कोई दुर्घटना होने पर कैसी भयानक स्थिति होगी, इसे सोचकर ही मन विचलित हो जाता है।
    
वक्ताओं ने कहा कि प्रशासन द्वारा खड़ी की गई दीवार और सीलबंदी से रेशमबाड़ी, दूधिया नगर और पहाड़गंज से आने-जाने वाले नमाजियों और मृतकों के जनाजों को कब्रिस्तान में दफनाने को लाने का आम रास्ता भी बंद हो गया है। इससे पहले जो दूरी करीब 10 मीटर की थी अब यह एक डेढ़ किलोमीटर हो गई है, जो कि भीड़-भाड़ वाले इलाके से होकर जाती है। हर साल मुहर्रम के अवसर पर  निकाले जाने वाले जुलूस और ताजिये को कब्रिस्तान में दफ्न करने को भी अब इसी रास्ते से गुजरना होगा। ऐसे में असामाजिक व सांप्रदायिक तत्वों द्वारा माहौल खराब करने की पूरी संभावना रहेगी। वर्तमान समय में भी ऐसे तत्वों द्वारा उक्त स्थान को गंगाजल छिड़ककर, हनुमान चालीसा पढ़कर शुद्ध करने, मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को अतिक्रमणकारी बताकर और भड़काऊ बयानबाजी करके माहौल खराब करने की पूरी कोशिश की गई है। पूर्व में भी ऐसे ही सांप्रदायिक तत्वों द्वारा शहर का माहौल खराब किया जा चुका है।
    
वक्ताओं ने कहा कि ईदगाह के मैदान में पूर्व में खुद नगरपालिका द्वारा ही बारात घर व शेड का निर्माण कराया गया था। काफी समय पहले विधायक निधि से दीवार भी बनाई गई थी। किन्तु आज झूठी कहानी गढ़कर पीड़ित मुस्लिम समुदाय को ही अतिक्रमणकारी के रूप में प्रचारित करके बदनाम किया जा रहा है।
    
वक्ताओं ने कहा कि खेल हेतु खेलकूद का मैदान बच्चों की शिक्षा व मानसिक-शारीरिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है, किन्तु नगर निगम व प्रशासन द्वारा मैदान की सील बंदी करके वहां के छात्रों और बच्चों से यह अधिकार छीनकर उनके बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन किया गया है। यहां स्थित बारात घर हर समुदाय के लोगों के लिए हर समय खुला रहता था। नगर निगम और प्रशासन की उक्त कार्यवाही के बाद अब क्षेत्र के लोगों से यह बारात घर छिन गया है। इससे लोग सड़कों पर शादी-ब्याह आदि आयोजन करने को विवश हैं। इससे भी असामाजिक तत्वों द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति भंग करने के प्रबल आसार हैं।
    
वक्ताओं ने कहा कि इस मैदान में ईद, मुहर्रम आदि अवसरों पर 20-25 हजार लोग विगत सात-आठ दशकों से सामूहिक रूप से नमाज पढ़ते हैं, जो कि इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा है। ईदगाह का मैदान छिन जाने से अब ऐसे मौकों पर लोग कहां सामूहिक नमाज पढ़ेंगे? इसी मैदान में स्थित मजार पर उर्स (मेला) लगता है, जिसमें भी भारी भीड़ होती है। नगर निगम व प्रशासन द्वारा मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों के शौचालय को भी सीलबंद कर देना घोर अमानवीय व असंवेदनशील कृत्य है।
    
वक्ताओं ने कहा कि ईदगाह के मैदान को रुद्रपुर और आस-पास के पूरे ही क्षेत्र की समस्त जनता के मध्य ईदगाह मैदान के रूप में मान्यता प्राप्त है। किसी को इससे कभी कोई समस्या नहीं रही। भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि हर नागरिक के सम्माजनक जीवन जीने और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी राज्य और सरकार की है। नगर निगम और प्रशासन की उपरोक्त कार्यवाही भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 और 26 का घोर उल्लंघन है।
    
वक्ताओं ने कहा कि रुद्रपुर शहर और यह तराई का पूरा क्षेत्र कौमी एकता का गुलदस्ता है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण ईदगाह की जमीन को बचाने को गठित की गई ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति और उसके नेतृत्व में चल रहा यह सामूहिक सत्याग्रह और उपवास का कार्यक्रम है। जिसमें मजदूर, किसान, कर्मचारी, छात्र, महिला, सामाजिक संगठन और हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी समुदाय के लोग हजारों की संख्या में शामिल हैं। यही हमारे शहर, प्रदेश और देश की खूबसूरती है। हम इस क्षेत्र की कौमी एकता को, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को कमजोर करने को रची जा रही किसी भी साजिश को परवान नहीं चढने देंगे। भगतसिंह और अशफाक-बिस्मिल के देश में धर्म के धंधे नहीं चलने देंगे। 
    
कार्यक्रम के अन्त में प्रशासन को दो हफ्ते का समय दिया गया कि ईदगाह के मैदान पर 5 दिसम्बर 2025 की स्थिति बहाल करके उसे तत्काल पीड़ित मुस्लिम समुदाय को निःशुल्क आवंटित अथवा फ्री होल्ड पट्टा जारी कर हस्तांतरित करे। 
    
वक्ताओं ने कहा कि आगे के कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर आंदोलन को आगे बढ़ाया जायेगा। जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।     
            -रुद्रपुर संवाददाता
 

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