सन इंटरनेशनल कंपनी में मजदूरों का फूटा गुस्सा

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गुडगांव/ आई एम टी मानेसर, गुड़गांव में स्थित सेक्टर 4 प्लाट नंबर 202 में सन इंटरनेशनल के नाम से कंपनी है। यह कंपनी एक्सपोर्ट लाईन की है। यहां पर डेढ़-दो सौ महिलाएं और लगभग तीन सौ पुरुष मजदूर काम करते हैं। यहां पर जब काम होता है, तो मजदूरों को उनकी मर्जी के खिलाफ अतिरिक्त काम के लिए रोका जाता है। लेकिन जब काम कम हो जाता है तब मजदूरों को ब्रेक दे दिया जाता है। मजदूरों को कभी फोन के नाम पर तो कभी तम्बाकू के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है। मजदूरों का कहना था कि कंपनी अपने नियम बनाकर गेट पर लगा दे, जिससे मजदूर उसी नियम के अनुसार काम करने आएं। लेकिन कंपनी ऐसा तो करती नहीं बल्कि काम के दौरान चेक करती है कि कौन फोन चला रहा है और कौन तम्बाकू खा रहा है। यह चेक करने का काम तो गेट पर होता है। लेकिन कंपनी ऐसा नहीं करती। मजदूरों में कम्पनी प्रबंधन के इस व्यवहार के प्रति गुस्सा रहता है।
    
12 सितंबर को सुबह लगभग 9-10 बजे मजदूरों का गुस्सा कंपनी में फूट पड़ा। इसका कारण यह था कि जनरल शिफ्ट में तीन मजदूर मात्र तीन मिनट लेट हो गये थे। फिर कंपनी गार्डों ने उन तीनों मजदूरों को धक्का देकर बाहर निकाल दिया। गार्डों के इस घटिया व्यवहार का बाकी मजदूरों को पता चला तो सारे मजदूर कंपनी के मुख्य गेट पर पहुंच गए। वहां इकट्ठा होकर उक्त घटिया हरकत का विरोध करने लगे।
    
मजदूरों ने गेट पर इस घटना के खिलाफ एकता के साथ अपना भाईचारा दिखाया। मैनेजमेंट के लोग मजदूरों के इस भाईचारे से घबराकर मजदूरों के बीच आकर चिकनी-चुपड़ी बातें करने लगे। लेकिन मजदूर रोज ब रोज ऐसी जिल्लत भरी जिंदगी जीते हैं। प्रबंधन के ही लोग कंपनी के अंदर मजदूरों से कैसा व्यवहार करते हैं और मजदूरों की एकता के सामने कैसी चिकनी-चुपड़ी बातें करने लगे। मजदूरों को भी अपने सहज बोध से समझ में आ गया कि जो कुछ हासिल हो सकता है इसी मौके पर हो सकता है। यहां से हटने के बाद कुछ नहीं होगा। इस प्रकार मजदूर अपने विरोध को जारी रखे रहे। मजदूरों ने अपने मजदूर साथियों के इस अपमान के विरोध के साथ-साथ अन्य मांगें भी रखीं। मजदूरों ने कहा कि उनका वेतन बहुत कम है इसको बढ़ाया जाए। या बारह घंटे का वेतन आठ घंटे में दिया जाए और आठ ही घंटे की ड्यूटी कराई जाए। मैनेजमेंट ने भी मजदूरों के भाईचारे और ताव-तेवर देख पांच-छः मजदूरों को वार्ता के लिए बुला लिया।
    
घंटे भर वार्ता के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी कि आगे से मजदूरों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होगा। अगर कोई मजदूर दस मिनट लेट होता है तो लाईन लीडर अंदर काम पर ले जाएगा। इस प्रकार मजदूरों ने स्वतः स्फूर्त विरोध से आंशिक जीत हासिल की। ऐसा नहीं था कि मजदूरों के साथ ऐसा व्यवहार पहली बार हुआ हो। और मजदूर अचानक एकता कर अपने साथियों के साथ ख़राब व्यवहार के खिलाफ एकता कर गेट पर इकट्ठा हो गए। मजदूर लम्बे समय से इस तरह का अपमान सह रहे थे। और एक समय ऐसा आता है कि मजदूरों की सहन शक्ति समाप्त हो जाती है। उनके सामने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना ही आखिरी विकल्प बचता है। सन इंटरनेशनल के मजदूरों ने भी यही किया। ये बात अलग है कि ये विरोध स्वयंस्फूर्त था। लेकिन आज के समय में ट्रेड यूनियन आंदोलन कमजोर है। और मजदूरों का कोई क्रांतिकारी टे्ड यूनियन केन्द्र भी नहीं है जो मजदूरों को वर्गीय सोच पर खड़ा कर नेतृत्व दे सके। इन सभी कमियों की वजह से मजदूर अपने दर्द को दबाये हुए हैं। आने वाले समय में मजदूरों का यह इकट्ठा दर्द एक साथ जरूर फूटेगा। -गुड़गांव संवाददाता 

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