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भीमकाय मशीनों का शोरगुल, धूल और घुटन भरी हवा। सुरक्षा के नाम पर अस्पताल में प्रयोग होने वाला नोज मास्क। शाम तक नाक के भीतर काली लोहा मिश्रित गर्द जम चुकी है। खांसने पर का
भीमकाय मशीनों का शोरगुल, धूल और घुटन भरी हवा। सुरक्षा के नाम पर अस्पताल में प्रयोग होने वाला नोज मास्क। शाम तक नाक के भीतर काली लोहा मिश्रित गर्द जम चुकी है। खांसने पर का
हम किर्बी बिल्डिंग सिस्टम्स के सिडकुल हरिद्वार में काम करने वाले श्रमिक हैं। हम फैक्टरी में पिछले लगभग 20 सालों से कार्य कर रहे हैं। हमारी फैक्टरी में स्थायी एवं अस्थायी
मधुशालाएं खुलवाकर स्कूलों पर है ताला
हां तुमने बच्चों की शिक्षा पर है डाका डाला
आज दिनांक 31 मई तम्बाकू निषेध दिवस है। यह हिन्दुस्तान नामक अखबार में आया है। मैं हिन्दुस्तान नामक दैनिक अखबार का पाठक हूं। इसे पढ़कर मुझे तम्बाकू के बारे में लिखने की कुछ
मोहन पूरी ताकत से प्रकाश की उंगलियां दबा रहा है। प्रकाश का हाथ बिल्कुल ढीला है और उंगलियों में कोई प्रतिरोध नहीं है। ढीली उंगलियों का मांस और उसके भीतर मौजूद हड्डियां आप
मैं 23 जुलाई को अपने सेल्स कार्य के लिए रुद्रपुर गया। वहां विकास खण्ड अधिकारी से बात करनी थी लेकिन पंचायत चुनाव के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो पायी। मैं पैदल लौट रहा था। मै
पाचजंय प्लाईवुड फैक्टरी बरेली की फरीदपुर तहसील के फरीद में स्थित है। फरीदपुर के एक गांव की रहने वाली रेखा देवी उम्र 40 वर्ष इस फैक्टरी में मशीन से छिली ढलाई को बंडल बांध
बीते कुछ समय से ड्रोन द्वारा चोरी की अफवाह या हकीकत सोशल मीडिया पर छाई हुई है। उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में हत्या और लूटपाट की खबरों में कितनी सच्चाई है यह तो तथ्यों की
साथियो,
मैं कोई नेता नहीं-
बस तुम्हारा एक साथी हूं,
एक मजदूर,
जिसके हाथों की दरारों में
इस देश की नींव बसी है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।