शहीद भगतसिंह हमारे देश के ऐसे महान क्रांतिकारी रहे हैं जो कि अपने जन्म (28 सितम्बर, 1907) और अपनी शहादत (23 मार्च, 1931) के इतने सालों बाद भी देश के मजदूरों, किसानों और युवाओं को क्रांतिकारी बदलाव के लिये प्रेरित करते हैं। प्रति वर्ष उनके जन्म दिवस और शहादत दिवस पर क्रांतिकारी-प्रगतिशील संगठन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर आम जन को उनके क्रांतिकारी विचारों से परिचित कराते हैं और उनके सपनों का भारत बनाने हेतु क्रांतिकारी संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं।
इस अवसर पर विभिन्न क्रांतिकारी जनवादी संगठनों-ट्रेड यूनियनों ने सभा-जुलूस आदि कार्यक्रम कर भगत सिंह को याद किया। ये कार्यक्रम उत्तराखण्ड के हरिद्वार, जसपुर, रामनगर, लालकुंआ, रुद्रपुर, किच्छा, पंतनगर, उ.प्र. के बदायूं, बलिया, गाजीपुर, मेरठ, हरियाणा के कुरूक्षेत्र आदि शहरों में आयोजित किये गये। पंजाब में आपदा राहत मंच द्वारा चलाये जा रहे मेडिकल कैम्प में भी भगत सिंह को याद किया गया। इस दौरान मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी को भी याद किया गया। वहीं उत्तराखण्ड में युवाओं की बढ़ती बेकारी व पेपर लीक से उनकी रोजगार की चाहत पर कुठाराघात भी चर्चा का विषय रही।
हरिद्वार, रुद्रपुर आदि जगहों पर ट्रेड यूनियनों व अन्य संगठनों ने मजदूर वर्ग की दशा पर चर्चा की। शोषण मुक्ति के लिए भगत सिंह के दिखाये रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराया गया। साथ ही फासीवादी संघ-भाजपा के अत्याचारों से मुक्ति के लिए भी इंकलाब की जरूरत पर जोर दिया गया।
रामनगर में कुछ संगठनों ने अंधविश्वास के प्रति जागरूक करने का काम व भगतसिंह के जीवन पर नाटक भी प्रस्तुत किया। उत्तराखण्ड में पेपर लीक के विरोध में चल रहे संघर्ष का समर्थन किया गया।
बलिया-गाजीपुर के ग्रामीण इलाकों में किसानों व खेतिहर मजदूरों की दुर्दशा चर्चा का मुद्दा रही। पंजाब के मेडिकल कैम्प में बाढ़ के लिए सरकारों को दोषी ठहराया गया और राहत काम में सरकारों की आनाकानी को चिन्हित किया गया।-विशेष संवाददाता