22 सितंबर 2025 की शाम को बवाना औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर 4 के डी ब्लाक के प्लाट नंबर 165 में स्थित एक फैक्टरी के मजदूर (राजेश शाह) की लिफ्ट गिरने से चोट लग जाने से मृत्यु हो गई। राजेश शाह समस्तीपुर बिहार का रहने वाला है जो अभी पूठ खुर्द में रहता था। राजेश गन प्रिंटिंग का आपरेटर था और कंपनी में 8 साल से कार्य कर रहा था। लिफ्ट में माल डालना आपरेटर का कार्य नहीं है। लेकिन छोटी कंपनी में कोई कानून लागू नहीं होता है। लिफ्ट की वायर टूटने के कारण लिफ्ट मजदूर पर आ गिरा। जिसके कारण मजदूर को कोई अंदरूनी चोट लगी और लिफ्ट के नीचे पैर आ गया। यह दोपहर 3 बजे के करीब की बात है। राजेश को पूठ खुर्द के वाल्मीकि हास्पिटल में लाया गया। और बाद में अंबेडकर हास्पिटल में रैफर कर दिया गया। शाम 6 बजे के करीब राजेश की उपचार के दौरान मौत हो गई।
कंपनी मालिक ने राजेश का कोई ईएसआईसी और पीएफ नहीं काटा था। राजेश 8 साल बिना ईएसआईसी और पीएफ के काम करता रहा। राजेश को न्यूनतम वेतन से कम वेतन दिया जा रहा था। एक आपरेटर का 8 घंटे का वेतन 22,411 रुपए बनता है और 12 घंटे का 45 हजार के करीब बनता है। पीएफ मिलाकर 50 हजार के करीब बनता है। राजेश को अठारह हजार वेतन दिया जाता था। राजेश शाह के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं एक 11 साल का लड़का है और 8 साल के करीब लड़की है। राजेश का 23 सितंबर को पोस्टमार्टम हुआ, पोस्टमार्टम के बाद डेड बाडी परिवार को सुपुर्द की गई। परिवार डेड बाडी को कंपनी के पास लेकर आया। इस दौरान पुलिस ने डेड बाडी कंपनी के सामने रखने नहीं दी। एक-दो घंटे इस चीज को लेकर तनाव बना रहा। लेकिन पुलिस ने कंपनी मालिक के ऊपर कोई दबाव नहीं बनाया। बवाना चैंबर एसोसिएशन ने भी मालिक का साथ दिया। बवाना चैंबर एसोसिएशन की बात पुलिस ज्यादा मानती है।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के 2 कार्यकर्ता इस संघर्ष में शामिल रहे। उपेंद्र और योगेश ने पुलिस की तानाशाही को झेला। पुलिस ने इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ता योगेश कुमार को दो बार उठाने का प्रयास किया। परिवार, रिश्तेदार और मजदूर साथियों के सहयोग के कारण पुलिस को पीछे हटना पड़ा। अंत में 5ः30 बजे के करीब पुलिस द्वारा लाठी चार्ज के मूड से लठ बवाना थाने से मंगाए गए और उसके बाद मजदूरों को तितर-बितर कर दिया गया और लठ के दम पर पुलिस ने मजदूर का अंतिम संस्कार करवा दिया। एक बार फिर मजदूर वर्ग की हार हुई, इस तथाकथित लोकतंत्र में सत्य हार गया और पुलिस और पूंजीपति वर्ग की तानाशाही जीत गयी। इस संघर्ष में पुलिस और कंपनियों के सारे गुर्गे, जो बवाना चैंबर एसोसिएशन में हैं, वह मजदूर को न्याय नहीं मिले, इस चीज के लिए एकजुट दिखे और मजदूरों ने थोड़ी एकता दिखाई, लेकिन व्यापक एकता ना होने के कारण मजदूर को न्याय नहीं दिला सके।
अब कोशिश की जाएगी कि उस मजदूर की कानूनी लड़ाई लड़ी जाए और उसको सही तरीके से मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाए। रात 8 बजे के करीब मजदूर के परिवार से मिला गया। मालिक ने नाममात्र का मौखिक आश्वासन दिया है। कल बुलाया है। इस प्रकार बिहार के एक मजदूर की मौत पर मजदूरों के प्रयास के बावजूद पूंजीपति वर्ग के लठैत यानी पुलिस ने मजदूरों को न्याय लेने से रोक दिया। यह बवाना औद्योगिक क्षेत्र के हालात हैं। यहां बिल्कुल गुंडाराज चल रहा है कोई श्रम कानून लागू नहीं हैं कोई कानून का राज नहीं है। रोज मजदूरों के फोन छीने जाते हैं। मजदूरों के साथ बदतमीजी होती है। उनके साथ मारपीट होती है और कंपनी मालिक, बवाना चैंबर एसोसिएशन, प्रशासन मिलकर मजदूरों का दमन कर रहा है। -दिल्ली संवाददाता