मजदूर संघर्ष

हरिद्वार : सिडकुल मजदूरों का जुलूस

हरिद्वार/ 3 अक्टूबर 2023 को संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार ने सैकड़ों मजदूरों के साथ जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पर एक सभा की। सभा क

बेलसोनिका यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द - मजदूर आक्रोशित

गुड़गांव/ 23 सितम्बर 2023 को ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार, हरियाणा ने बेलसोनिका यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। इस तरह श्रम विभाग ने हरियाणा में जुझारू संघ

इंटरार्क मजदूरों का संघर्ष जारी - जनसुनवाई का ऐलान

रुद्रपुर/ जिला प्रशासन की मध्यस्थता में सम्पन्न हुए समझौता दिनांक 15 दिसम्बर 2022 को लागू कराने को इंटरार्क मजदूरों का आंदोलन जारी है। विदित हो कि वर्ष 2

अमेरिका : आटो मजदूरों की हड़ताल

15 सितम्बर को अमेरिका की तीन बड़ी कंपनियों जनरल मोटर्स, फोर्ड और स्टेलेन्टिस (पूर्व में क्रिसलर) के 13,000 मजदूर अपनी यूनियन यूनाइटेड आटो वर्कर (यू ए डब्ल्यू) के नेतृत्व म

पंजाब में श्रम कानूनों में घोर मजदूर विरोधी बदलाव

पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार ने देशी-विदेशी पूंजीपतियों की इच्छा के अनुरूप मजदूरों पर बड़ा हमला बोलते हुए फैक्टरी एक्ट, 1948 में बदलाव कर दिया है। इसके तहत अब राज्य मे

जी-20 सम्मेलन और मजदूर वर्ग

दुनिया भर के शीर्ष पूंजीवादी-साम्राज्यवादी देश 9-10 सितम्बर को जी-20 की बैठक के लिए दिल्ली में इकट्ठा हुए। लुटेरे शासकों की इस बैठक से दुनिया भर के मजदूर वर्ग को अपनी बेह

बेलसोनिका मजदूरों का जी-20 के विरोध में पैदल मार्च

गुड़गांव/ दिनांक 9 सितंबर 2023 को बेलसोनिका यूनियन ने मारुति सुजूकी फैक्टरी मानेसर के गेट नंबर 4 से सुबह 10ः00 बजे जी-20 के सम्मेलन स्थल तक अपना तय कार्यक

अभियान में प्रशासन द्वारा अवरोध पैदा करने की कोशिश

हल्द्वानी (उत्तराखंड)/ 16 अगस्त की शाम को हल्द्वानी के बनभूलपुरा के इलाके में परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और प्रगतिशील महिला ए

ठेका मजदूरों ने संघर्ष के दम पर हासिल किया वेतन

पंतनगर/ दिनांक 24 अगस्त 2023 को जुलाई माह का वेतन भुगतान नहीं होने से गुस्साए गार्डन सैक्सन के ठेका मजदूरों ने सुबह काम बंद कर दिया। मजदूरों ने लम्बित जुलाई माह का वेतन और हर माह क

इंटरार्क मजदूर फिर संघर्ष की राह पर

रुद्रपुर/ विगत वर्ष 2021 एवं वर्ष 2022 में इंटरार्क कंपनी सिडकुल पंतनगर एवं किच्छा जिला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) में कार्यरत मजदूरों का 16 माह लंबा एवं जु

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

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शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

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जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

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हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

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दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।