हल्द्वानी/ उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में पूरे पदों पर भर्तियां करने की जगह उसके विकल्प में आउअसोर्सिंग भर्तियां की जा रही हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल में उपनल के तहत भर्तियां की गयीं। क्योंकि सरकार ने अपने ‘‘बजट’’ का रोना रोया।
भारत सरकार ने 1991 से नयी नीतियां लागू कीं- निजीकरण-उदारीकरण-वैश्वीकरण। इन नीतियों के तहत पूरे देश में सरकारी संस्थानों में ठेके पर भर्तियां की गयीं। इस तरह जो पद सरकारों द्वारा पक्की नौकरी हेतु बने थे उन पर आउटसोर्सिंग के तहत भर्तियां की जाने लगीं। आउटसोर्सिंग के तहत तनख्वाह के 15-20 प्रतिशत रुपये ठेकेदार द्वारा ले लिये जाते हैं और अन्य बची तनख्वाह कर्मचारी को मिलती है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में करीब 750 पदों पर उपनल के द्वारा भर्तियां की गयीं। उपनल कर्मचारी को कम वेतन 12,000 रुपये से लेकर 15,000 रु. तक विभिन्न श्रेणियों में मिलते हैं।
‘‘कोरोना’’ बीमारी आने पर उपनल के तहत कार्यरत कर्मचारियों ने जान हथेली पर रख कर काम किया। बीच में कई बार उपनल कर्मचारियों को कई महीनों तक तनख्वाह नहीं मिली। पिछले महीने 4 जुलाई से उपनल के 750 कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल की। उपनल कर्मचारियों से बात की गयी तो उपनल कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें 5 माह से तनख्वाह नहीं मिली है। कर्मचारी बिना वेतन कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपनल कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन से विनती की कि उन्हें उनका वेतन तुरंत दिया जाये तो शासन-प्रशासन ने कहा कि उनके पद सृजित नहीं हैं इसलिए उनका वेतन नहीं बन पा रहा है। उपनल कर्मचारी कई वर्षों से कार्य कर रहे हैं, उन्हें वेतन मिलता रहा तो किस मद से यह वेतन किस प्रक्रिया से आता रहा है। सरकार यह बताने को तैयार नहीं है।
पिछले एक हफ्ते से उपनल कर्मचारियों ने 3 घण्टे कार्य न करने की योजना बनायी है। क्योंकि उनके पास खर्च चलाने के लिए रुपये नहीं हैं तो वह जीवन कैसे बितायें। 11 अगस्त 2025 को सुबह उपनल के लोगों ने कार्य बहिष्कार किया तो पर्ची बनाने वाले लोग 2-3 घण्टे लाइन से खड़े रहे।
उपनल के कर्मचारियों से बात की गयी तो एक महिला कर्मचारी रोने लगी। बोली कि 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन का त्यौहार था। हमारे बच्चों की कई मांगें थीं। हम उसे पूरी न कर पाये। सरकार तमाम बातें मीडिया-अखबारों में प्रचारित करती है कि सरकार अच्छा कार्य कर रही है लेकिन हिन्दू धर्म की बात करने वालों के शासन में राखी बंधन को हम नहीं मना पाये।
स्वास्थ्य विभाग में ये उपनल मजदूर (कर्मचारी) पूरे दिन कार्य करते हैं लेकिन सरकार उन्हें वेतन देने में सक्षम नहीं है। स्वास्थ्य कर्मचारी जब महीनों से बगैर वेतन काम करने को मजबूर हों तो स्वास्थ्य विभाग कैसे कार्य करेगा व गरीब मेहनतकश लोगों को कैसे स्वास्थ्य सुविधा मिल पायेगी? -हल्द्वानी संवाददाता