विविध

मारूति प्रबंधन क्या कवच बदलकर वर्ग संघर्ष को रोक पाएगा?

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गुड़गांव/ मानेसर मारूति में 18 जुलाई 2012 में हुए मारूति काण्ड के पीछे असल कारण यह था कि मारूति यूनियन ने ठेका प्रथा खत्म करने तथा सभी ठेका मजदूरों को स्थ

ओसामू सुजुकी को पद्म विभूषण-मजदूरों को लाठी-गोली

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भारत सरकार ने वर्ष 2025 के लिए सात लोगों को पद्म विभूषण देने का एलान किया है। इन सात लोगों में सुजुकी मोटर कम्पनी के पूर्व चेयरमैन ओसामू सुजुकी का भी नाम है। राष्ट्रपति द

आंध्र प्रदेश : काम के घण्टे 10 करने का फरमान

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आंध्र प्रदेश की चंद्र बाबू नायडू सरकार प्रदेश में निवेश जुटाने और पूंजीपतियों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसी कड़ी में उसने प्राइवेट सेक्टर में मजदू

बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं पर लगे झूठे मुकदमों का अंत

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हल्द्वानी/ बनभूलपुरा बस्ती को रेलवे द्वारा अतिक्रमण बताए जाने के विरोध में कई स्तर पर संघर्ष चलता रहा है। इसमें ही बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के जरिये इसे स

स्पेन में आंदोलनरत हजारों धातु मजदूर

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आजकल स्पेन में हजारों धातु मजदूर आंदोलनरत हैं। कहीं धातु मजदूर हड़ताल पर हैं तो कहीं हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। धातु मजदूरों की यूनियन मजदूरों के संघर्ष को रोकने,

भारत का कपड़ा उद्योग : महिला मजदूरों के अंतहीन शोषण की कब्रगाह

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भारत में वस्त्र एवं परिधान उद्योग में महिला एवं पुरुष मजदूर दोनों ही शामिल हैं लेकिन इस क्षेत्र में एक बड़ा हिस्सा महिला मजदूरों का बन जाता है। भारत में इस क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत श्रम शक्ति महिला मजदूरों की है। इतनी बड़ी मात्रा में महिला मजदूरों के लगे होने के चलते इस उद्योग को महिला प्रधान उद्योग के बतौर भी चिन्हित किया जाता है। कई बार पूंजीवादी बुद्धिजीवी व भारत सरकार महिलाओं की बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में कार्यरत होने के चलते इसे महिला सशक्तिकरण के बतौर भी प्रचारित करती है व अपनी पीठ खुद थपथपाती है।

अजब-गजब राष्ट्रवाद

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हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी साहब का व्यवहार देखिये। ट्रम्प के सामने ये ढेर हैं। वह इनकी ही नहीं हमारे देश के लोगों की सरेआम बेइज्जती करता है। हथकड़ियों में हमारे महान देश के लोगों को अमेरिका से भूखा-प्यासा संगीनों के साये में भेजता है। भारत के प्रधानमंत्री के मुंह में दही जम जाता है और हालिया चार दिनी युद्ध में अमेरिका हमें हमारी औकात बताता है। मोदी साहब के मुंह से अमेरिका के खिलाफ एक लफ्ज भी नहीं फूटता है और अब ये महाशय देश में शान से फौजी ड्रेस में अपने पोस्टर लगवाते हैं। और अपना ऐसा स्वागत करवाते हैं मानो न जाने कौन सी जंग फतेह कर ली है। ट्रम्प के सामने जिनकी जुबान नहीं खुलती वे देश के भीतर दहाड़ने लगते हैं।

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।