हिन्दू फासीवादी ये ना करें तो और क्या करें
कुछ लोग कहते हैं और कई सोचते हैं कि हिन्दू फासीवादियों को मंदिर-मस्जिद की नफरती राजनीति नहीं करनी चाहिए। जहां कहीं भी मस्जिद हैं, मदरसे हैं उनके नीचे हिन्दू मंदिर होने का
कुछ लोग कहते हैं और कई सोचते हैं कि हिन्दू फासीवादियों को मंदिर-मस्जिद की नफरती राजनीति नहीं करनी चाहिए। जहां कहीं भी मस्जिद हैं, मदरसे हैं उनके नीचे हिन्दू मंदिर होने का
बदायूं/ पूरे देश को संघी फासीवादी अपनी करतूतों से देश को अराजकता और दंगों की आग में झोंक रहे हैं।
भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले की सहयोगी एवं भारत की प्रथम मुस्लिम शिक्षिका फातिमा शेख के जन्मदिवस के अवसर पर 9 जनवरी को ग्राम पटरानी, रामनगर व बदायूं में सभा का आयोजन किया गया।
रुद्रपुर/ नगर निकाय चुनाव उत्तराखण्ड में घोषित हो चुके हैं। 23 जनवरी को होने वाले इन चुनावों के लिए सभी प्रमुख राजनैतिक दल ताल ठोंक चुके हैं। उत्तराखण्ड
हरिद्वार/ उत्तराखंड के हरिद्वार में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन का दो दिवसीय सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के दूसरे दिन 3 जनवरी 2025 को सम्मेलन क
गुड़गांव/ दिनांक 10 जनवरी 2025 को बेलसोनिका यूनियन ने श्रम विभाग की मध्यस्थता में हुए 12(3) के त्रिपक्षीय समझौते (दिनांक 01 जून 2023) को लागू करवाने के लि
लालकुंआ/ सेन्चुरी पेपर मिल में अगस्त 2024 से नवम्बर 2024 तक चली स्थायी श्रमिकों द्वारा त्रिवार्षिक समझौते को अपनी मांगों के अनुरूप कराने की मुहिम का समाप
‘एक देश-एक चुनाव’ हिन्दू फासीवादियों के अलावा इनके आका अडाणी-अम्बानी-टाटा जैसी एकाधिकारी घरानों की भी चाहत है। समय-समय पर होने वाले चुनाव इन्हें अपनी लूट में बाधा दिखाई देते हैं। अगर सरकार गिरती, बनती-बिगड़ती है तो इनका गणित गड़बड़ा जाता है। इन्हें नयी सौदेबाजियां करनी पड़ती हैं। जिस ‘‘विकास’’ का हवाला मोदी एण्ड कम्पनी तथा एकाधिकारी घरानों का पालतू मीडिया रात-दिन देता है। वह क्या है? वह भारत के प्राकृतिक संसाधनों की लूट के साथ भारत के मजदूरों-किसानों का निर्मम शोषण है।
मोदी सरकार का देश की शिक्षा व्यवस्था पर हमला बोलना बदस्तूर जारी है। अभी हाल में ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपने कुछ नये नियम जारी किये। इन नियमों से विश्वविद्यालयों
ट्रम्प ने घोषणा की है कि कनाडा को अमरीका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। अपने निवास मार-ए-लागो में मजाकिया अंदाज में उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को गवर्नर कह कर संबोधित किया। ट्रम्प के अनुसार, कनाडा अमरीका के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है, इसलिए उसे अमरीका के साथ मिल जाना चाहिए। इससे कनाडा की जनता को फायदा होगा और यह अमरीका के राष्ट्रीय हित में है। इसका पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और विरोधी राजनीतिक पार्टियों ने विरोध किया। इसे उन्होंने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ कदम घोषित किया है। इस पर ट्रम्प ने अपना तटकर बढ़ाने का हथियार इस्तेमाल करने की धमकी दी है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।