एंकर (पैनासोनिक) कम्पनी के मजदूर शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर

/anchor-panasonik-factory-ke-workers-shoshn-utpidana-ke-khilaaf-sadakon-par

हरिद्वार/ दिनांक 29 अप्रैल को सिडकुल (हरिद्वार, उत्तराखंड) में एंकर (पैनासोनिक) कंपनी के मजदूर वेतन वृद्धि और शोषण उत्पीड़न के खिलाफ काम बंद कर सडकों पर उतर आये।
    
एंकर कम्पनी में तीनों प्लांटों के स्थाई व अस्थाई लगभग 4000 मजदूर हड़ताल कर कम्पनी गेट पर बैठ गए हैं। 
    
उनकी मांगें हैं :-
1. मजदूरों का 35,000 रु. वेतन किया जाये।
2. ठेका मजदूरों को स्थाई किया जाए।
3. ठेका मजदूरों को बोनस दिया जाए।
    
एंकर कम्पनी में बड़ी संख्या में महिला मजदूर काम करती हैं। श्रम विभाग के अधिकारियों व मैनेजमेंट द्वारा कोई आश्वासन न मिलने से महिला मजदूरों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
    
एंकर की महिला मजदूरों के संघर्ष में इंकलाबी मजदूर केंद्र, संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा से जुड़ी किर्बी श्रमिक कमेटी, फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी, एवरेडी मजदूर यूनियन, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, सीमेंस वर्कर्स यूनियन (सी-एस) एवं कर्मचारी संघ सत्यम आटो भागीदारी कर रहे हैं। कम्पनी प्रबंधक व पुलिस प्रशासन लगातार समर्थन करने आये संगठनों को भड़काने वाले तत्व कहकर मजदूरों को गुमराह कर रहा है। इंकलाबी मजदूर केंद्र के पंकज कुमार, जय प्रकाश, कर्मचारी संघ सत्यम आटो के महीपाल, किर्बी मजदूर कमेटी सहित 8 मजदूर नेताओं पर फर्जी मुकदमे लगा दिये हैं। मजदूर संगठन के लोगों पर पुलिस द्वारा फर्जी मुकदमे रोड जाम करने के आरोप में लगाये गये हैं। भारी पुलिस बल लगाकर मजदूरों को डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन महिला मजदूर निडर हो कर आंदोलन को चला रही हैं। 
 

आलेख

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।