इतनी जल्दी तो चूजा भी मुर्गा नहीं बनता

बहन मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनन्द को ठीक चुनाव के पहले अपनी पार्टी बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक और उत्तराधिकारी घोषित किया था। आकाश आनन्द ने चुनाव में ऐसे-ऐसे बयान दिये कि हर कोई हैरान था कि बसपा को क्या हो गया। मोदी सरकार की तुलना तालिबान से कर डाली थी। मामला बिगड़ता उससे पहले बहन मायावती ने ठीक चुनाव के बीच में यह कहकर आकाश आनन्द को राष्ट्रीय समन्वयक के पद और अपने उत्तराधिकार से वंचित कर दिया कि वे अभी ‘‘अपरिपक्व’’ हैं।
    
इधर चुनाव निपटे, चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला। पर बहन मायावती को चुनौती देने वाले चन्द्रशेखर रावण संसद में पहुंच गये। चुनाव परिणाम के बाद अभी दो हफ्ते भी नहीं बीते कि न जाने क्या करिश्मा हुआ। आकाश आनन्द ‘‘परिपक्व’’ हो गये। बहन मायावती ने फिर से अपने लाडले भतीजे को बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक और अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। बहन जी! आकाश आनन्द इतनी जल्दी कैसे परिपक्व हो गये। इतनी जल्दी तो चूजा भी मुर्गा नहीं बनता। 

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मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।