पिछले दिनों घटी एक घटना कारपोरेट मीडिया में चर्चा का विषय नहीं बनी। क्या सत्ता क्या विपक्ष सभी को सांप सूंघ गया। यह घटना थी 18 सितम्बर को अमेरिकी जासूस मैथ्यू वेनडाइक सहित 6 यूक्रेनी नागरिकों (सेना से जुड़े) को गुपचुप जमानत दे दी गयी। 24 सितम्बर को तो उन्हें एक माह के लिए अपने घर (विदेश) जाने की अनुमति भी दे दी गयी।
गौरतलब है इन 7 विदेशी नागरिकों को कोलकाता, लखनऊ, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। यह सातों गैर आधिकारिक ढंग से भारत के उत्तर पूर्व इलाके में कई दिनों से घूम रहे थे। यहां से वे म्यांमार गये और वहां एक सरकार विरोधी सशस्त्र समूह को ड्रोन सहित आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण दिया। रूस से इनपुट मिलने के बाद इन्हें पकड़ा गया। भारत का उत्तर पूर्व इलाका जो अति संवेदनशील है, से म्यांमार में घुस कर इस तरह के प्रशिक्षण की कार्यवाही भारतीय राज्य के लिए निश्चित ही खतरनाक है। कुछ सोशल मीडिया चैनलों में उस समय सी आई ए के इस जासूस के बारे में बताया गया। वह पहले भी कई देशों मंे बड़ी कार्यवाहियों में शामिल रहा बताया गया। साथ ही सी आई ए के नशे के कारोबार की चर्चा भी हुई।
13 मार्च 2026 को इनकी गिरफ्तारी के समय ही मोदी सरकार के हाथ-पांव फूल गये। सरकार के हाव-भाव से इस समय ही स्पष्ट था कि जल्द ही इन जासूसों को छोड़ने का रास्ता ढूंढ लिया जायेगा। इनके पकड़े जाने के कुछ ही देर बार अमेरिकी विदेश विभाग, दूतावास सक्रिय हो गया। मोदी सरकार की स्थिति ऐसी थी जैसे धोखे से उसने अमेरिकी अश्वमेध वाला अश्व पकड़ लिया हो, अब क्या करे समझ में नहीं आ रहा है।
खैर रास्ता निकाल लिया गया। रास्ता था एक बार फिर अपनी अमेरिकापरस्ती का। गिरफ्तारी के वक्त ने एन आई ए ने इन पर आतंकी होने का आरोप लगाते हुए यू ए पी ए की धाराएं लगायीं। लेकिन 180 दिन तक इस मार्फत चार्जशीट नहीं लगायी। परिणामतः यू ए पी ए की धारा हट गयी और अब गैर अधिकृत तौर पर भारत में घूमने की धारा लगी रही। जैसा कि स्पष्ट ही था इन धाराओं में तुरंत ही जमानत मिल गयी और फिर एक माह के लिए घर वापस जाने की अनुमति मिल गयी। देश की जनता को बरगलाने के लिए, अपनी किरकिरी से बचने के लिए भले ही कहा जा रहा है कि एन आई ए सप्लीमेंट्री चार्जशीट लायेगी। सिर्फ एक माह के लिए परिवार से मिलने के लिए ही भेजा गया है।
इन मासूम बातों पर कोई अंधभक्त ही विश्वास कर सकता है। जो दुनिया में अमेरिकी साम्राज्यवाद को जानते हैं, वे जानते हैं भारत किस तरह से उसकी जी हजूरी कर रहा है। वे सब जानते हैं कि मोदी सरकार की यह हरकत अमेरकीपरस्ती का एक और उदाहरण है। और अब शायद ही ये अमेरिकी-यूक्रेनी मुकदमे के लिए भारत वापस आयें।