हरिद्वार/ किर्बी श्रमिक कमेटी द्वारा पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 नवंबर और 28 नवंबर को प्रातः 10 बजे चिन्मय डिग्री कालेज से पूरे सिडकुल में होते हुए श्रम विभाग तक रैली निकाली गई और उसके बाद सभा की गयीं। सभा के बाद एक ज्ञापन उप श्रमायुक्त को सौंपा गया।
किर्बी कम्पनी के प्रबंधन की हठधर्मिता और तानाशाही के खिलाफ मजदूरों में काफी आक्रोश है। श्रम अधिकारी के भी कई वार्ताओं में उपस्थित नहीं रहने से मजदूरों की कमेटी ने निर्णय लिया कि अपने परिवार, बाल-बच्चों के साथ लगातार रैली निकालकर प्रदर्शन करेंगे। हर वार्ता में पूरे सिडकुल के मजदूरों को जागरूक करते हुए श्रम विभाग को अपनी सामूहिक ताकत के दम पर वार्ता सफल कराने के लिए विवश करेंगे।
सभा व रैली में किर्बी श्रमिक कमेटी के सैकड़ों सदस्य और उनके परिवार की महिला और बच्चों के अलावा संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा, इंकलाबी मजदूर केंद्र, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, भारतीय किसान यूनियन, एवरेडी मजदूर यूनियन, सीमेंस वर्कर्स यूनियन (सी एंड एस), फूड्स श्रमिक यूनियन, आईटीसी, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, कर्मचारी संघ सत्यम आटो के पदाधिकारियों ने भी भागीदारी की।
श्रम विभाग और किर्बी प्रबंधन किर्बी के मजदूरों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। सात महीने से तारीख पर तारीख दिये जा रहे हैं। समाधान नहीं निकाला जा रहा है। दो श्रमिक नेताओं को 15-20 साल काम कराने के बाद फर्जी दस्तावेज के नाम पर इसलिए निकाल दिया गया कि उन्होंने मजदूरों को हक-अधिकार दिलाने के लिए संगठित करना शुरू कर दिया था। मजदूर प्रतिनिधियों ने आवाज उठाई कि किर्बी प्रबंधन बीस साल से हमारा महंगाई भत्ता (डी ए) नहीं दे रहा है, जो कि साल में दो बार बढ़ता है। आठ घंटे के स्थान पर सवा आठ घंटे काम लिया जाता है। मशीनों का संचालन ठेका श्रमिकों से कराया जाता है। जबकि किर्बी कम्पनी में भर्ती का कोई मापदंड नहीं है। अनपढ़ से लेकर पढ़े-लिखे सभी एक तरह का काम करते हैं। किर्बी श्रमिक कमेटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि 9 दिसंबर तक संयुक्त मांग पत्र पर सुनवाई नहीं होती है तो मजदूरों को आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय प्रबंधन के साथ-साथ हैदराबाद के अधिकारी भी मजदूर प्रतिनिधियों को डराने-धमकाने का कार्य कर रहे हैं। हम अपना हक मांग रहे हैं और डरने वाले नहीं हैं।
सिडकुल की कई फक्टरियों में श्रम कानूनों का खुल्लेआम उल्लघंन किया जा रहा है। एवरेडी कम्पनी में दो साल से वेतन वृद्धि समझौता न्यायालय में लंबित है। एवरेस्ट कम्पनी का वेतन वृद्धि समझौता एक साल से श्रम विभाग में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रहा है। हरिद्वार का श्रम विभाग समस्याओं को निपटाने के स्थान पर उदासीनता का रुख अपना रहा है। इस तरह के व्यवहार से औद्योगिक अशांति बढ़ेगी।
केन्द्र सरकार ने मजदूरों के 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 मजदूर विरोधी लेबर कोड्स लाकर मजदूरों को गुलाम बनाने की साजिश की है। मजदूरों की जब चाहे तब छंटनी का अधिकार पूंजीपतियों को दे दिया है। यूनियन बनाना कठिन कर दिया गया है। 8 घंटे के कार्यदिवस के कानूनी अधिकार पर हमला बोला गया है। महिला मजदूरों से रात की पाली में काम कराने की छूट नई श्रम संहिताओं में देकर महिलाओं के प्रति अपराधों को बढ़ाने का रास्ता खोल दिया गया है। इसलिए समय की मांग है कि एक फैक्टरी के मजदूर अपने संघर्षां में अन्य फैक्टरियों के मजदूरों को साथ में लाने का प्रयास करें। सभी फैक्टरियों के मजदूरों को एक साथ संगठित होकर आन्दोलन की रूपरेखा बनानी होगी। हमें ध्यान में रखना होगा कि सारे कम्पनियों के मालिक मजदूर वर्ग को लूटने के लिए देश व राज्य के साथ-साथ सिडकुल स्तर पर भी एकजुट हैं।
28 नवंबर की वार्ता में सहायक श्रमायुक्त ने किर्बी प्रबंधन से 9 दिसंबर तक मजदूरों के सामूहिक मांग पत्र पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए कहा है। किर्बी कम्पनी के मजदूर बीस साल से प्रबंधन वर्ग की तानाशाही झेल रहे थे अब वे अपने अधिकारों के लिए मिलकर संघर्ष कर रहे हैं।
-हरिद्वार संवाददाता