बेलसोनिका यूनियन पर राजनीतिक हमले के विरोध में मजदूर सम्मेलन
गुड़गांव/ गुड़गांव-मानेसर की बेलसोनिका यूनियन को रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन, हरियाणा द्वारा यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की धमकी के साथ जारी कारण बताओ नोटिस के विरुद्ध मजदूरों का आक्
गुड़गांव/ गुड़गांव-मानेसर की बेलसोनिका यूनियन को रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन, हरियाणा द्वारा यूनियन का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की धमकी के साथ जारी कारण बताओ नोटिस के विरुद्ध मजदूरों का आक्
बदायूं/ 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के द्वारा बदायूं में ट्रैक्टर मार्च का आयोजन किया गया। बदायूं में ए आर टी ओ आफिस के पास 11 बजे से ही ट्रैक्टर ल
गुड़गांव/ प्रोटेरियल (हिताची) के ठेका मजदूरों ने अपना सामूहिक मांग पत्र जुलाई 2022 में श्रम विभाग में डाला था। कंपनी में मालिकाना हिताची से प्रोटेरियल को ट्रांसफर होना था। मजदूरों क
गुड़गांव/ 15 फरवरी 2023 को मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन के बैनर तले जुलूस व धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम किया गया जिसमें मुख्य मांग मारुति सुजुकी के बर्खास्त मजदूरों को काम पर वापस ले
आज का दिन बाकी दिनों से कुछ अलग नहीं था। आपने फिल्मों में अक्सर देखा होगा, किसी मालिक, अफसर बाबू को फैक्टरी या ऑफिस जाते हुए देखा होगा पत्नी का गले लगाकर बाय कहना, बच्चों की प्यार भरी पप्पी। कितना
मैं देखता हूं लोगों को रोज ब रोज आगे बढ़ने के लिए तमाम तजबीजों का सहारा लिए हाड़तोड़ मेहनत करते। आगे बढ़ने से मेरा आशय जीवन चलाने हेतु सम्पत्ति, साजो सामान जुटाते जाने से है जिससे अच्छा जीवन हो। जो जिस
पंतनगर/ दिनांक 7 फरवरी 2023 को मैं एक मरीज को लेकर ई.एस.आई.
दिसंबर के आखिरी हफ्ते में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दिल्ली एनसीआर में शीत लहर चल रही है और पारा 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। इस कड़कड़ाती ठंड में जब घरों के अंदर रजाई-कंबल में भी रहना मुश्किल हो रह
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।