दुनिया में भयावह होती स्थिति
इजरायल द्वारा गाजा में 18 महीनों से जारी युद्ध में अभी तक 54,000 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें अधिकांश संख्या में महिलाएं व बच्चे हैं। अब इजरायली शासक गाजा को मिटा डालने पर
इजरायल द्वारा गाजा में 18 महीनों से जारी युद्ध में अभी तक 54,000 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें अधिकांश संख्या में महिलाएं व बच्चे हैं। अब इजरायली शासक गाजा को मिटा डालने पर
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर भाजपा के कई नेताओं के अश्लील वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा के अपनी पार्टी के बारे में उछाले जाने वाले नारे ‘‘चाल, चरित
भारत आबादी के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा देश है और उसकी अर्थव्यवस्था भी खासी बड़ी है। इसीलिए दुनिया के सारे छोटे-बड़े देश उसके साथ कोई न कोई संबंध रखना चाहेंगे। इसमें कोई गर्व की बात नहीं है। गर्व की बात तब होती जब उसकी कोई स्वतंत्र आवाज होती और दुनिया के समीकरणों को किसी हद तक प्रभावित कर रहा होता। सच्चाई यही है कि दुनिया भर में आज भारत की वह भी हैसियत नहीं है जो कभी गुट निरपेक्ष आंदोलन के जमाने में हुआ करती थी।
उन्माद एक खतरनाक व नकारात्मक शब्द है। किसी भी प्रकार का (धार्मिक, नस्ल, राष्ट्र, जातीय) उन्माद देश समाज के लिए खतरनाक है। संघी/भाजपाई इस उन्माद को पूरे देश में फैलाने में
हल्द्वानी/ दिनांक 4 मई को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा अपने स्थाई रोजगार व न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर उत्तराखंड के हल्द्वानी (नैनीताल) के बुद्ध पार्
बदायूं/ दिनांक 27 अप्रैल 2025 को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन और जनहित सत्याग्रह मोर्चा द्वारा जाति के सवाल पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का व
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस अथवा मई दिवस मजदूरों के संघर्षों का प्रतीक दिवस है जो कि पहली मई को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न क्रांतिकारी संगठन एवं वर्ग सचे
हरिद्वार/ सिडकुल में एंकर पैनासोनिक कंपनी के लगभग 4000 से अधिक स्थायी एवं अस्थायी मजदूरों ने अपनी हड़ताल को एक हफ्ते के बाद आश्वासन पर समाप्त कर दिया। हरि
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।