क्या यह जनप्रतिनिधि हैं?
हरियाणा विधानसभा के चुनाव हाल में ही सम्पन्न हुए हैं। इसमें जीत कर आए विधायकों द्वारा भारत निर्वाचन चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल हालफनामा के विवरण के आधार पर एसोसिएशन फार डे
हरियाणा विधानसभा के चुनाव हाल में ही सम्पन्न हुए हैं। इसमें जीत कर आए विधायकों द्वारा भारत निर्वाचन चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल हालफनामा के विवरण के आधार पर एसोसिएशन फार डे
हरियाणा के चुनाव में भाजपा की जीत अप्रत्याशित है। इसकी अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीके से व्याख्या कर रहे हैं। तब मन में एक सवाल तो बनता है कि भाजपा जीत गयी तो उसके जीत के कारण
चले गए मालिक हमारे अलविदा !
टाटा मालिक !
दुखी हैं हम सब कुत्ते दुनियां के कुत्ते
फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन के कुत्ते
मसलन 2005 में पैदा हुए सलवा जुडूम के पिल्ले
कल सुबह 9 बजे पूजन है। उसके बाद की क्या प्लानिंग है? रामू अपने बाकी मजदूर साथियों के साथ बातचीत में लगा हुआ है। कल आना है क्या? अगर नहीं आए तो क्या अप्सैंट लगेगी?
चल उठ ओ नौजवान
कब से सोया है? सपनों में खोया है
तेरे सामने जिंदगी खड़ी है
आ कदम मिला तू कर ले फैसला
ये इम्तिहान की सख्त घड़ी है।
हमारे देश में किसी अन्य चीज में दिलचस्पी हो या न हो परंतु चुनाव में सबकी दिलचस्पी रहती है। भले ही दो राज्यों के विधानसभा के चुनाव थे परंतु इन चुनाव में दिलचस्पी देशव्यापी
अमरीकी साम्राज्यवादियों के सक्रिय सहयोग और समर्थन से इजरायल द्वारा फिलिस्तीन और लेबनान में नरसंहार के एक साल पूरे हो गये हैं। इस दौरान गाजा पट्टी के हर पचासवें व्यक्ति को
7 अक्टूबर को आपरेशन अल-अक्सा बाढ़ के एक वर्ष पूरे हो गये हैं। इस एक वर्ष के दौरान यहूदी नस्लवादी इजराइली सत्ता ने गाजापट्टी में फिलिस्तीनियों का नरसंहार किया है और व्यापक
भगत सिंह के जन्म दिवस पर कार्यक्रम करने पर पछास के कार्यकर्ताओं पर एबीवीपी के गुंडों ने जानलेवा हमला किया जिसके विरोध में हरिद्वार में इमके, प्रमएके, पछास, बीएचईएल ट्रेड
आरएसएस-भाजपा की पूरी विचारधारा, सोच, राजनीति झूठ और फरेब से भरी है। इनका राष्ट्रवाद फर्जी सिद्धान्तों पर खड़ा है। और यह राष्ट्रवाद मजदूरों-मेहनतकशों के हितों के स्थान पर देशी-विदेशी पूंजी और भारतीय समाज के घोर प्रतिक्रियावादी तत्वों की रक्षा करता है। इनके राष्ट्रवाद की जो कोई गहराई से छानबीन करेगा वह पायेगा कि इसमें जातिवाद, नस्लवाद, मर्दवाद, धार्मिक पाखण्ड-प्रपंच, अन्य धर्मों के प्रति गहरी घृणा व आक्रामकता कूट-कूट कर भरी है। सरल शब्दों में इनके राष्ट्रवाद का मतलब- पाकिस्तान-बांग्लादेश के साथ रात-दिन अलग-अलग ढंग से मुसलमानों को गाली देना है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।