ओवरटाइम भाग-2
पृथ्वी लगातार तीव्र गति से अपने अक्ष पर घूम रही है। प्रत्येक 24 घंटे में मानव जाति इसे अगले दिन में बदलता हुआ देखती है। परंतु फैक्टरी का जीवन पृथ्वी के घूमने के हिसाब से
पृथ्वी लगातार तीव्र गति से अपने अक्ष पर घूम रही है। प्रत्येक 24 घंटे में मानव जाति इसे अगले दिन में बदलता हुआ देखती है। परंतु फैक्टरी का जीवन पृथ्वी के घूमने के हिसाब से
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चलाई जा रही ‘‘बुलडोजर न्याय’’ की नीति आज देश के अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान आदि में भी देखने को म
यह वाकया पहाड़ों से यानी उत्तराखण्ड के पहाड़ों से जुड़ा है। एक दौर था कि जब उत्तराखण्ड को अलग राज्य बनाने के लिए आम जनता बड़ी मशक्कत और जद्दोजहद में लगी थी। वह उत्तराखण्ड राज
नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में अब जनता की आशाओं पर तुषारापात होने लगा है। पिछले 10 साल से सत्ता पक्ष ने अपनी गढ़ी कहानियों के जरिये लोगों में कुछ बेहतर करने की उम्मीद
नये-नये नामों से योजनायें पेश कर जनता को भरमाने और अपना उल्लू सीधा करने में माहिर नरेंद्र मोदी द्वारा अब यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) नाम से एक नई योजना लाकर ओल्ड पेंशन स्क
हल्द्वानी/ जीआईएस कंसोर्टियम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एच-112, प्रथम तल, सेक्टर 63, नोएडा, उत्तर प्रदेश, भारत, 201-301 ऑनलाइन सर्वे करने वाली कंपनी है, जिस
मानेसर(गुड़गांव)/ एजी फैक्टरी में स्थाई श्रमिकों की छंटनी की प्रक्रिया वर्ष 2022 से जारी है। इस समय फैक्टरी में केवल 48 मजदूर स्थाई व लगभग 300 श्रमिक ठेका
फरीदाबाद/ फरीदाबाद (हरियाणा) में इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा 29 अगस्त को मजदूरों का 8 घंटे का न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए करने व हरियाणा सरकार द्वारा मजदूरो
‘‘बस, अब बहुत हुआ’’ राष्ट्रपति मुर्मू का बयान हर अखबार के फ्रंट पेज पर छपा। जो खूब चर्चा का विषय बना।
दिल्ली/ जन अभियान-दिल्ली द्वारा 25 अगस्त को ‘इजरायली हमला और फिलीस्तीन मुक्ति संघर्ष की चुनौतियां’ विषय पर गढ़वाल भवन में एक कन्वेंशन का आयोजन किया गया।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।