आप में फूट: भाजपा का काला कारनामा

Published
Fri, 05/01/2026 - 15:50
/aap-mein-phoot-bhajapa-ka-kala-karanaamaa

अब भाजपा के काले कारनामों का ताजा शिकार आम आदमी पार्टी (आप) बनी है। आप के राज्यसभा के दस सांसदों में से सात सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। राघव चड्ढा जो कल तक भाजपा की पोल खोलता फिरता था अब केजरीवाल और आप पार्टी की पोल खोल रहा है। उसे और उसके साथियों को भाजपा महान राष्ट्रवादी, साफ-सुधरी पार्टी नजर आती है तो मोदी नया भगवान नजर आते हैं। राघव चड्ढा की किस कमजोर नस पर मोदी-शाह ने हाथ रखा इसका खुलासा तो समय करेगा पर उनके एक साथी- अशोक मित्तल के ठिकानों पर चंद दिन पहले ही ई डी आदि ने छापे मारे थे। मित्तल ‘लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी’ (एल पी यू) का मालिक है। एल पी यू पंजाब की एक ऐसी निजी यूनिवर्सिटी है जिसने कई तरह से नाम कमाया हुआ है। इधर मित्तल के ठिकाने पर छापे पड़े और उधर उन्होंने मोदी के चरण पकड़े। 
    
आप पार्टी और भाजपा में ज्यादा से ज्यादा फर्क इतना है कि एक अर्द्ध फासीवादी पार्टी है तो दूसरी पूरी तरह फासीवादी है। केजरीवाल ‘जी’, मोदी ‘जी’ का लघु संस्करण ही है। और अमेरिका से दोनों का समान लगाव है। दोनों ढंग से जानते हैं कि कैसे जनता की आंख में धूल झोंकी जाती है। धर्म का राजनीति में इस्तेमाल, लोक-लुभावन वाद, अंधराष्ट्रवाद, पोंगापंथ आदि में केजरीवाल मोदी ‘जी’ का जितना अनुसरण करते हैं उतना ही उनसे होड़ भी करते हैं। इस तरह राघव चड्ढा एण्ड कम्पनी का आप पार्टी से पलायन छोटे मोदी से बड़े मोदी की मण्डली में शामिल होना भर है। राघव चड्ढा की सारी बातें उतनी ही खोखली और थोथी हैं जितनी उनके पुराने या नये आका की हैं। 
    
आप पार्टी का उत्थान जितनी तेजी से हुआ था उसका पराभव भी उतनी ही तेजी से हो रहा है। और यह कोई अनोखी बात नहीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नाम पर बनी पार्टी भ्रष्टाचार का ही प्रतीक बन गयी। यह एक दशक से भी कम समय में हुआ। पूंजीवादी राजनीति में अक्सर ही यह होता है। जो सबसे ज्यादा गरीबों की बात करता है वह सबसे ज्यादा गरीबों का गला रेतता है। जो सबसे ज्यादा महिलाओं की बात करता है वह महिलाओं का जीना मुहाल कर देता है। जो राजनीति में शुचिता की बात करता है वह सांसद-विधायकों के टिकट पैसे लेकर बांटता है। 
    
आप पार्टी राघव चड्ढा एण्ड कम्पनी के जाने के बाद आपदा का शिकार है और मोदी एण्ड कम्पनी आपदा में अवसर ढूंढ रही है। पंजाब मंे अगले साल विधानसभा चुनाव भी हैं। 

आलेख

/peace-bond-vishesh-karyakari-majistrate-v-shakti-prathakkaran-siddhant

शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धान्त यह मत प्रस्तावित करता है कि लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए जरूरी है कि कार्यपालिका-विधायिका व न्यायपालिका परस्पर स्वतंत्र हों। अगर कार्यपालिका किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करना चाहे तो न्यायपालिका उसे रोक दे। फ्रांसीसी दार्शनिक मांतेस्क्यू को इस शक्ति पृथक्करण के सिद्धान्त का मूल प्रस्तावक माना जाता है।

/regime-change-or-vyavastha-parivartan

पूंजीवादी जनतंत्रों में चुनाव ‘सेफ्टी बाल्व’ का काम करता है। बदहाल और दुःखी परेशान लोग नयी सरकार को चुन उम्मीद करते हैं कि उनकी जिन्दगी में शायद बेहतरी हो जाये। अमरीका जैसे देश में तो इसी वजह से दोनों प्रमुख पार्टियां बारी-बारी से सत्ता में आती रहती हैं। चुनाव के जरिये सरकारें बदलती रहती हैं और पूंजीवादी व्यवस्था बदस्तूर चलती रहती है। मजदूर-मेहनतकश जनता बेहतरी की मृग मरीचिका में जीती रहती है। 

/janavad-ka-sawal-aur-majdoor-varg

मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।