अपराधी जेल में सवाल बाहर

Published
Sat, 09/26/2026 - 20:50

जमुई-समस्तीपुर कांड

बीते दिनों बिहार में दो बेहद शर्मनाक घटनाएं सामने आयीं। एक घटना जमुई और दूसरी घटना समस्तीपुर में। जमुई में एक नाबालिग छात्रा और उसके मित्र के साथ कुछ लम्पटों द्वारा बदतमीजी और मार-पीट की गयी। दूसरी घटना में भी कुछ लम्पट एक लड़की के साथ बदतमीजी करते हुए दिख रहे हैं। दोनों घटनाओं में लम्पटों का गिरोह महिलाओं के साथ बेहद अश्लील हरकतें कर रहा है। सारी मर्यादा लांघ कर महिलाओं को मर्यादित होने को कह रहा है।

दोनों घटनाएं सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुई। पुलिस द्वारा अपराधियों को पकड़कर जेल भेज दिया गया है। जमुई कांड में तो पुलिस द्वारा एक अपराधी के किये गये हाफ एनकाउंटर पर भी सवाल उठ रहे हैं।

वैसे तो कहा जा सकता है मामला समाप्त हो गया। एक अपराध हुआ और अपराधी दूसरे दिन तक जेल भेज दिये गये। लेकिन कुछ बातें हैं जो बेहद परेशान करने वाली हैं। पहली बात बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी से जुड़ी है।

घटना के कुछ दिन बाद सम्राट चैधरी ने एक कार्यक्रम में कहा- लोग रील बनाने के चक्कर में पकड़े जा रहे हैं। अपराधियो तुम चुपचाप अपना काम करो लेकिन पुलिस को चुनौती मत दो। सम्राट चैधरी के बयान को यदि तार्किक ढंग से देखें तो उन्हें प्रदेश में महिला के खिलाफ हुई इन घृणित कृत्य से दिक्कत नहीं है। महिला के खिलाफ अपराध पर वे कुछ नहीं बोले। उन्हें चिंता है तो बस पुलिस को चुनौती देने वालों से। उन्हें चिंता है अपराधियों के पकड़े जाने से। वे उन्हें आगे के लिए नसीहत भी देते हैं। अपराध करो लेकिन सीनाजोरी करते हुए रील मत बनाओ।

जमुई में बी बी सी की ग्राउंड रिपोर्ट में एक व्यक्ति ने बताया कि यह लम्पटों का गिरोह इस तरह की दसियों घटनाएं पहले कर चुका है लेकिन अब पकड़ में आया है। अगर रील पोस्ट होने से मामला सोशल मीडिया में नहीं आता तो किसी को कुछ पता नहीं चलता। तब शायद सम्राट चैधरी के मन की बात हो जाती और न पकड़े जाने तक हो भी रही थी। मोदी की भाषा में कहें तो कहा जा सकता है ‘‘सब चंगा सी’’।

जब सोशल मीडिया पर यह घटना वायरल हुई तो सरकार की खूब किरकिरी हुई। आगे ऐसी घटनाओं की रील कोई वायरल न करे इसलिए पुलिस ने न केवल अपराधियों पर कार्यवाही की वरन् पोस्ट को वायरल करने वालों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है।

परेशान करने वाली कुछ वीडियो वाइट भी हैं जिसमें कुछ स्थानीय लोग दबी जबान में ही सही लम्पटों को सही ठहरा रहे हैं और लड़की पर दोष मढ़ रहे हैं उसके शाम 7 बजे बाहर घूमने, कपड़े आदि को लेकर। यह सोच समाज में पसरी पुरुष प्रधानता की सोच को दिखाती है। कुछ मर्द हैं जो मर्यादित हैं। सुसंस्कृत हैं जिनके ऊपर यह बीड़ा है कि वह ऐसी महिलाओं को सबक सिखायें। इस पवित्र बीड़े के लिए वे यदि अश्लीलता करें चाहे तो बलात्कार ही कर दें; सब जायज है।

पुरुष प्रधानता की यह सोच हर जगह पसरी हुयी है। क्या गांव क्या शहर यहां तक कि सत्ता और सत्ता के अंग-उपांगों तक पसरी हुई है। देश की महिलाएं इस सोच से रोज प्रताडित हो रही हैं। इसके खिलाफ महिलाएं रोज लड़ रही हैं। अपनी जगह बना रही हैं। इस दिशा में हमारे सामूहिक प्रयास, सामाजिक आंदोलन आवश्यक हैं। इससे ही हमने अपनी जगह बनायी है। और पूर्ण बराबरी भी हासिल करेंगे।

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