अर्जेन्टीना : गरहान अस्पताल के कर्मचारी संघर्षरत

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अर्जेन्टीना में पिछले दो महीनों से गरहान अस्पताल के कर्मचारी अपनी वेतन वृद्धि, स्टाफ की भर्ती और आपूर्ति और आधारभूत ढांचे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के लिए हाल ही में (17 जुलाई) अर्जेन्टीना की राजधानी ब्यूनर्स आयर्स में एक रैली निकाली जिसमें कर्मचारियों के साथ बच्चे, छात्र, रिटायर्ड कर्मचारी आदि शामिल हुए। इससे पहले इन्होंने ब्यूनर्स आयर्स के मध्य में स्थित ओबेलिस्क में एक कैंडिल लाइट मार्च भी निकाला था। गरहान अस्पताल के कर्मचारियों का संघर्ष अर्जेन्टीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में की जा रही कटौती के विरोध का प्रतीक बन गया है। 
    
गरहान अस्पताल बच्चों के इलाज की स्पेशिलियटी वाला अस्पताल है जो 1987 में स्थापित किया गया था। इसका 80 प्रतिशत बजट केन्द्र सरकार और 20 प्रतिशत बजट ब्यूनस आयर्स शहर की सरकार से आता है। बाकी कुछ सेवाओं के बदले अस्पताल मामूली पैसा लेता है। इसमें न केवल देश भर से आये बच्चों का इलाज होता है बल्कि विदेशों से भी इलाज के लिए लोग आते हैं। ऐसे में इस अस्पताल के महत्व को समझा जा सकता है। एक तरफ सरकार इसकी फंडिंग को कम करके इसका निजीकरण करना चाहती है वहीं दूसरी तरफ सरकार ने अस्पताल में एक काउंसलर की नियुक्ति की है जिसकी तनख्वाह 60 लाख पैसो (अर्जेन्टीना मुद्रा) यानी करीब 5000 डालर प्रति माह है।
    
गरहान अस्पताल में काम कर रहे डाक्टर का कहना है कि वे 60 से 70 घंटा प्रति सप्ताह काम करते हैं। उसके बावजूद उन्हें प्रति माह मात्र 600 डालर मिलते हैं। इतने कम वेतन में वे अपने परिवार का खर्च नहीं चला सकते। उनकी मांग वेतन को 1500 डालर करने की है। गरहान अस्पताल के अन्य कर्मचारी भी अक्सर ही घर का खर्च चलाने के लिए दूसरे काम भी करते हैं। कम वेतन की वजह से 220 कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं। 
    
दूसरी तरफ स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि अस्पताल में फंडिंग की समस्या नहीं है बल्कि समस्या प्रबंधन की है। वे कहते हैं कि अस्पताल में आलसी लोगों को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। वे अस्पताल में लोगों की निगरानी के लिए बायोमैट्रिक मशीन लगाना चाहते हैं। उनका कहना है कि उनकी सरकार ने पिछली सरकार की अपेक्षा ज्यादा पैसा अस्पताल के लिए दिया है। लेकिन एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जनवरी माह में जब वेतन में 1.2 से 1.4 प्रतिशत की वृद्धि की गयी उस समय मुद्रा स्फीति की दर 2.2 से 3.7 प्रतिशत थी। ऐसे ही स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि उन्होंने 1 जुलाई से वेतन बढ़ा दिया है। और यह बढ़कर 1100 डालर हो जायेगा। लेकिन जो वेतन बढ़ाया गया है वह बोनस के रूप में बढ़ाया गया है जिसे हासिल करने की कुछ शर्तें हैं। और इस प्रक्रिया में 90 प्रतिशत लोग तो वह बोनस हासिल कर ही नहीं पायेंगे। 
    
गरहान अस्पताल के निजीकरण की चाहत रखने वाले सुझाव के तौर पर कहते हैं कि अस्पताल को डॉक्टरों के हवाले कर देना चाहिए। कि वे इसका प्रबंधन करें। सरकार से उन्हें कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि वह अस्पताल के लिए पैसा देगी। जिनके पास सामाजिक सुरक्षा होगी और जिनका स्वास्थ्य बीमा होगा वे अपना इलाज करा सकते हैं। उनके कहने का मतलब यही है कि बाकी लोग इलाज के लिए पैसा देंगे। जाहिर है ऐसे में जिनके पास सामाजिक सुरक्षा नहीं है और न ही स्वास्थ्य बीमा वे इस इलाज से बाहर हो जायेंगे। 

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