बेलसोनिका प्रबंधन के मजदूरों पर बढ़ते वैचारिक हमले

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गुड़गांव/ बेलसोनिका फैक्टरी में यूनियन व प्रबंधन के मध्य छंटनी को लेकर हुए संघर्ष को ज्यादा समय नहीं हुआ है। बेलसोनिका यूनियन ने प्रबंधन की छंटनी के खिलाफ अपनी वर्गीय एकता बनाकर संघर्ष को लड़ा था। यूनियन ने ठेका मजदूर को अपनी यूनियन का सदस्य बनाकर वर्गीय एकता को व्यवहारिक रूप देकर प्रबंधन के ठेका व स्थायी के विभाजन को खारिज करते हुए प्रबंधन की छंटनी के खिलाफ संघर्ष की मिसाल पेश की थी। लेकिन मजदूरों की यह वर्गीय एकता न तो बेलसोनिका प्रबंधन को रास आई और न श्रम विभाग, शासन-प्रशासन को। बेलसोनिका प्रबंधन को मारूति प्रबंधन का सीधा समर्थन प्राप्त था। बेलसोनिका प्रबंधन ने श्रम विभाग के साथ गठजोड़ कायम कर यूनियन का पंजीकरण गैर कानूनी तरीके से खारिज करवा दिया। यूनियन के पंजीकरण के खारिज होते ही प्रबंधन ने पहले तो एक जून के समझौते को लागू करने से मना करते हुए यूनियन के तीन पदाधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। उसके बाद प्रबंधन ने जो महत्वपूर्ण काम किया वह यह कि प्रबंधन ने क्रांतिकारी कार्यकर्ताओं-कामरेडों के बारे में दुष्प्रचार करना शुरू किया कि कामरेडों ने यूनियन को बर्बाद कर दिया। कामरेड बेलसोनिका प्रबंधन के साथ मिलकर नहीं चले, यूनियन का काम प्रबंधन के साथ मिलकर चलना होता है इसलिए कामरेडों ने यूनियन का पंजीकरण रद्द करवा दिया। प्रबंधन ने यह भी दुष्प्रचार किया कि यूनियन का काम केवल स्थायी मजदूरों की वेतन बढ़ोत्तरी करवाना है। इस दुष्प्रचार में प्रबंधन ने फैक्टरी में काम करने वाले एक समूह को अपने साथ खड़ा करके एक नई यूनियन का गठन कर लिया ताकि यूनियन द्वारा छंटनी के खिलाफ बनाई गई वर्गीय एकता की धार को खत्म कर छंटनी की जा सके। आखिरकार दिनांक 29 मार्च 2024 को प्रबंधन ने बेलसोनिका में नई यूनियन का गठन हुआ। इसे कोई भी सहज बुद्धि से समझ सकता है कि यह नयी यूनियन क्यों खड़ी की गयी। 
    
फिलहाल बेलसोनिका में नई यूनियन संचालित हो रही है। बेलसोनिका प्रबंधन पुरानी यूनियन और उसके द्वारा पैदा की गयी वर्ग संघर्ष की चेतना को कुंद करने के लिए नए-नए प्रयोग कर रही है। इन प्रयोगों के साथ-साथ वह नई गठित यूनियन को भी मजदूरों में स्थापित करने का काम कर रही है। प्रबंधन यह दूर की सोचकर, कर रहा है। मजदूरों की वर्ग संघर्ष की चेतना को कुंद करके उसके स्थान पर वर्ग सहयोग की पूंजीपति वर्ग की राजनीति के द्वारा यूनियन संचालित करने के उद्देश्य से प्रबंधन यह कर रहा है। आइये एक-एक करके प्रबंधन के वैचारिक हमले को समझते हैं।
    
बेलसोनिका प्रबंधन ने फिलहाल फैक्टरी में क्रिकेट, बैडमिन्टन की शुरूआत की है तथा मजदूरों के बच्चों के सुनहरे भविष्य को लेकर कैरियर काउंसलिंग करवायी जा रही है और यह सब केवल स्थायी मजदूरों के लिए है। ऊपर से देखने में तो यह एक सामान्य बात लगेगी लेकिन यह कोई सामान्य बात नहीं है। यह बेलसोनिका प्रबंधन का मजदूरों पर वैचारिक हमला है। बेलसोनिका प्रबंधन की इसके पीछे की मंशा साफ है कि मजदूरों के बीच विभाजन को बढ़ाकर यह स्थापित किया जाये कि यूनियन तो केवल स्थायी मजदूरों की होती है, यूनियन व मजदूरों को प्रबंधन के साथ मिलकर चलना होता है और वही अच्छा यूनियन नेतृत्व होता है जो प्रबंधन के साथ मिलकर चले। बेलसोनिका प्रबंधन की मंशा साफ है कि मजदूरों के दिमाग से वर्ग संघर्ष की वो बातें निकालना, उन नारों (एक मजदूर पर हमला, सब मजदूरों पर हमला, दुनिया के मजदूरो, एक हो, मजदूर-मजदूर भाई-भाई इत्यादि) को निकालना जिन नारों को कुछ समय पूर्व ये मजदूर प्रबंधन की छंटनी के खिलाफ लगाते थे। बेलसोनिका के ये वही मजदूर हैं जिन्होंने वर्ष 2017 में मारूति मजदूरों के विरूद्ध आए फैसले के खिलाफ दो घंटे का टूल डाउन कर मारूति मजदूरों के साथ अपनी वर्गीय एकजुटता दिखाई थी, ये वही बेलसोनिका के मजदूर हैं जिन्होंने वर्ष 2018 में केरल में आई भीषण बाढ़ के दौरान, केरल के मजदूरों-मेहनतकशों के साथ अपनी एकजुटता दिखाते हुए उनकी मदद की थी, यह बेलसोनिका के वही मजदूर हैं जिन्होंने किसान आंदोलन के समय, किसानों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई थी और आंदोलन के समर्थन में मजदूर-किसान पंचायत आयोजित कर तीन काले कृषि कानूनों का विरोध किया था, ये वही बेलसोनिका के मजदूर थे जो ठेका मजदूर को अपनी यूनियन का सदस्य बनाकर अपनी वर्गीय एकता को व्यवहारिक रूप देना चाहते थे। यही वैचारिक राजनीतिक समझ बेलसोनिका यूनियन और उसके मजदूरों की खूबसूरती थी। इसी कारण बेलसोनिका यूनियन, प्रबंधन व शासन-प्रशासन की आंखों की किरकिरी बनी हुई थी। 
    
एक तरफ तो बेलसोनिका प्रबंधन मजदूरों की छंटनी कर रहा है और दूसरी तरफ मजदूरों के बच्चों के भविष्य बनाने की नौटंकी कर रहा है। यह जख्म देकर मलहम लगाने का काम किया जा रहा है। वर्ष 2023 में बेलसोनिका प्रबंधन ने लगभग 26 श्रमिकों को नौकरी से बर्खास्त किया, उसके बाद वर्ष 2024 में लगभग 16 श्रमिकों को नौकरी से बर्खास्त किया तथा 65 श्रमिकों को जबरदस्ती वी.आर.एस. देकर नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। आज जब बेलसोनिका प्रबंधन यह सब ढांग-पाखण्ड कर मजदूरों पर वैचारिक हमला कर रहा है तो उसी समय जुलाई 2025 में एक श्रमिक को डराकर जबरदस्ती वी.आर.एस. दिया तथा अगस्त 2025 में एक श्रमिक को छुट्टियों का हवाला देकर वी.आर.एस. दिया गया। जुलाई 2025 में ही प्रबंधन ने तीन अन्य श्रमिकों को एक सप्ताह के लिए सस्पेंड कर दिया। एक तरफ तो प्रबंधन लगातार श्रमिकों की छंटनी कर रहा है और वहीं दूसरी तरफ श्रमिकों के बच्चों का भविष्य बनाने का ढांग रचकर, मजदूरों की वर्गीय चेतना को कुंद करने का काम कर रहा है।
    
दूसरी तरफ प्रबंधन ने उत्पादन का स्तर पहले की तुलना में बढ़ा दिया है। उत्पादन के दौरान अगर किसी श्रमिक से कोई गलती होती है तो प्रबंधन उन श्रमिकों को सस्पेंड करने से लेकर आरोप पत्र देने का काम कर रहा है। प्रबंधन का सुपरवाइजरों को यह आदेश है कि अगर श्रमिक कोई भी गलती करता है तो उन्हें सीधे एच.आर. विभाग में पेश किया जाए जहां वे अपने आप देख लेंगे। शॉप फ्लोर पर प्रबंधन ने इस कदर डर व भय पैदा कर दिया है कि श्रमिक शॉप फ्लोर की समस्याओं, सुरक्षा सम्बन्धी समस्याओं को यूनियन तक से बताने से डरते हैं। श्रमिक ऐसा महसूस कर रहे हैं कि जैसे फैक्टी में कोई यूनियन ही न हो। 
    
बेलसोनिका प्रबंधन इस समय मजदूरों को ट्रेनिंग के नाम पर छंटनी की धमकी दे रहा है कि तुम इतनी तनख्वाह लेकर काम नहीं कर रहे हो, ठेका मजदूर तुमसे ज्यादा काम करते हैं और तुमसे कम तनखाह लेते हैं। यह एक प्रकार से धमकी के साथ-साथ यह भी अहसास करवाना था कि अब यहां वह यूनियन नहीं है जो प्रबंधन की ऐसी कार्रवाहियों के खिलाफ वर्गीय एकता का आह्वान कर संघर्ष करती। 
    
फिलहाल प्रबंधन यह सब कर मजदूरों की वर्गीय एकता को कुंद करने का काम कर रहा है और अपने लिए छंटनी की राह सुगम कर रहा है। प्रबंधन मजदूरों के बीच नई यूनियन के नेतृत्व को स्थापित कर रहा है कि यूनियन नेतृत्व, प्रबंधन के साथ मिलकर चलने वाला होना चाहिए। यूनियन नेतृत्व का काम स्थाई मजदूरों की तनखाह की मांग उठाना होता है। इसमें जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि कुछ अग्रणी मजदूर प्रबंधन के इस हमले को समझ रहे हैं लेकिन प्रबंधन व नई यूनियन का मजदूरों पर संघर्ष की ओर न जाने का भयंकर दबाव है। इसके बावजूद भी पुरानी यूनियन अभी भी संघर्ष में बनी हुई है जो मजदूरों को फिर से एकजुट करने का काम काम करेगी व प्रबंधन के इस वैचारिक हमले का जवाब देगी।     -गुड़गांव संवाददाता    
 

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