भीषण गर्मी से परेशान अमेजन मजदूरों ने उठायी आवाज

भयंकर गर्मी से परेशान गुड़गांव के अमेजन के मजदूरों ने आवाज उठायी है। अमेजन इण्डिया वर्कर्स एसोसिएशन ने भयंकर गर्मी में काम कर रहे अमेजन के मजदूरों को राहत देने की बात की है। अमेजन के मजदूरों की शिकायत है कि वेयरहाउस में ज्यादा तापमान रहने की वजह से उन्हें काफी दिक्कत हो रही है और ऊपर से प्रबंधन उन्हें लक्ष्य पूरा न होने तक बाथरूम न जाने, पानी न पीने की बात कह रहा है। 
    
ज्ञात हो कि इस साल भारत के उत्तरी और पश्चिमी इलाके में भयंकर गर्मी पड़ रही है। साल 1901 के बाद ऐसी गर्मी पड़ी है। 27 मई को दिल्ली के इलाके में तापमान 49 डिग्री रिकार्ड किया गया था जिसने 1941 के 45.6 डिग्री के रिकार्ड को तोड़ दिया। यूनियन ने श्रम मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा विभाग में इस भयंकर गर्मी को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है।  
    
वेयरहाउस में काम कर रहे मजदूरों की शिकायत है कि वेयरहाउस में महिला और पुरुष मजदूर दोनों ही परेशान हैं। मजदूरों को यह कहा जा रहा है कि जब तक आप टारगेट पूरा नहीं कर लेते तब तक आप बाथरूम नहीं जा सकते। पानी नहीं पी सकते। पेशाब करने के लिए प्लास्टिक की बोतल का प्रयोग करो। महिला मजदूर तो गर्मी से इतनी परेशान हो जाती हैं कि वे रेस्ट में बाथरूम में जाकर आराम करती हैं। मजदूरों का यह भी कहना है कि सेल के कारण हमारे ऊपर सामान्य से ज्यादा काम का दबाव बढ़ जाता है। कैण्टीन तक में 32 डिग्री तापमान रहता है।
    
भीषण गर्मी में ऐसे ही बुरे हालात गिग मजदूरों के हैं। उन्हें समय पर डिलीवरी करनी है ताकि उनका टारगेट पूरा हो सके। लेकिन भयंकर लू में ऐसा संभव नहीं है या फिर मजदूर बीमार हो जाये। जान जाने का खतरा भी मौजूद है। ऐसे में अगर लक्ष्य को पूरा नहीं करेंगे तो उनकी आमदनी घट जायेगी। ऐसे में करें तो क्या करें। 
    
मजदूरों की यूनियन ने निम्न मांगें की हैं- 

1. श्रम मंत्रालय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी से आग्रह करे कि इस गर्मी को आपदा घोषित किया जाये। 
2. अमेजन और अन्य प्लेटफार्म मजदूरों को गर्मी के लिए अतिरिक्त भत्ता दिया जाये।
3. लू चलने के समय तक कार्ड ब्लॉक करने पर रोक लगायी जाये।
4. सभी प्लेटफार्म मजदूरों को पीने का पानी, टॉयलेट, शेड उपलब्ध करायी जाये।
5. लू से बचाव के उपाय के लिए प्रशिक्षण दिया जाये और मौसम के बारे में अलर्ट जारी किया जाये।
6. कुछ सुरक्षा उपकरण जैसे- यूवी शर्ट, धूप के चश्मे, धूप की क्रीम और ओ आर एस मुफ्त में उपलब्ध कराया जाये। 
7. लू लगने वाले मजदूर के लिए आपातकालीन एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाये।
8. अगर किसी मजदूर की लू के कारण आमदनी कम हो रही है तो उसे न्यूनतम मजदूरी प्रदान की जाये।
9. सभी वेयरहाउस में तापमान सामान्य रखा जाये।

आलेख

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?