एक तीर जो ठीक निशाने पर लगा

Published
Mon, 06/01/2026 - 15:50
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‘काॅकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) ने बहुुत तीखी आलोचना की है। अपने मुखपत्र आर्गनाइजर में ‘काॅकरोच सिंड्रोम: भारत विरोधी तकनीकी संशयवाद का नया चेहरा’ नाम से एक लेख छाप डाला। संघ की यह प्रतिक्रिया दिखलाती है कि तीर ठीक निशाने पर लगा है। हालांकि ‘काॅकरोच जनता पार्टी’ ने एक बार भी संघ की न तो कोई आलोचना की और न ही उसे घुमा फिरा कर कुछ कहा। संघ को बुरा लगा तो फिर क्यों लगा। जो सीजेपी हवा में है उसके खिलाफ वह तलवार भांजने लगा है। 
    
संघ ने छात्र-युवाओं के सोशल मीडिया पर व्यक्त आक्रोश व क्षोभ को ‘‘राजनीतिक रूप से तैयार किया गया अभियान’’ बताते हुए इसे ‘फ्री बी (मुफ्तखोरी) केन्द्रित, वामपंथी झुकाव वाले इको सिस्टम’ का हिस्सा बताया। 
    
संघ को ज्यादा मिर्ची इस बात से लगी है कि सीजेपी, बीजेपी व संघ के दोनों आकाओं अम्बानी-अडाणी के मीडिया घरानों के लाइसेंस रद्द करने की मांग कर रही है। इस मांग पर वह इतना आग-बबूला है कि वह इसे ‘शास्त्रीय स्टालिनवादी कम्युनिस्ट सेंसरशिप’ बताता है। अम्बानी-अडाणी को निशाने पर लेने को वह ‘घरेलू पूंजी पर दुर्भावना से भरा हुआ और लक्षित हमला’ बताता है। 
    
संघ को इस बात से भी बहुत बड़ी दिक्कत है कि सीजेपी केन्द्रीय मण्डल सहित संसद-विधान सभा में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करती है। एक फासिस्ट संगठन को यह, योग्यता को दरकिनार करने वाला लोकप्रियता के लिए गढ़ा गया खोखला नारा लगता है। संघ, भाजपा व स्वयं मोदी के स्त्री विरोधी चरित्र का इस तरह एक झटके में खुलासा हो जाता है। 
    
संघ को सीजेपी के भ्रष्ट चुनाव अधिकारियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी यू ए पी ए कानून लगाये जाने पर भी आपत्ति है। उसे दल-बदल करने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर लगाये जाने वाली पाबंदी से भी दिक्कत है। अगर किसी वक्त ऐसा हो गया तो भाजपा के आधे से ज्यादा नेता तो चुनाव ही नहीं लड़ पायेंगे। कई राज्यों में तो उसके मुख्यमंत्रियों को जेल भी जाना पड़ेगा। 
    
मजे की बात है संघ ने मुख्य न्यायाधीश के बेरोजगार छात्र-युवाओं को परजीवी, काॅकरोच कहने की एक बार भी आलोचना नहीं की है। 
    
संघ बेचारा क्या करे। उसे अपने पाले-पोषों व अपने पालनहार की रक्षा तो करनी ही पड़ेगी। और सीजेपी बीजेपी पर ही नहीं निशाना साध रही है बल्कि वह तो संघ की भी जड़ें खोद रही है।  

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