लाल हमारा रंग -अफ्रीकी कवि ए एम सी कुमात

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हमें ऐसी कविताओं की जरूरत है
जिनमें खून की रंग की आभा है
और दुश्मनों के लिए जिनसे आती है
यम के बैल की घंटी की आवाज,
कविताएं
जो अत्याचारी के चेहरे पर सीधे वार करती हैं
और उसके वार को और उसकी 
गिरफ्त को तोड़ती हैं,
कविताएं
जो मनुष्य में यह चेतना संचारित करती हैं
कि,    मृत्यु नहीं जीवन 
    निराशा नहीं आशा
    सूर्यास्त नहीं नवीन 
    प्राचीन नहीं नवीन
    समर्पण नहीं संघर्ष।
कवि
तुम जनता को बताओ
कि सपने सच्चाई में बदल सकते हैं
तुम स्वाधीनता की बात करो
और धन्ना सेठों को सजाने दो
थोथे कलाकर्मियों की कृतियों से
अपना बैठक कक्ष
तुम स्वाधीनता की बात करो
और जनता की आंखों को छुओ
उस बहुसंख्या की शक्ति के पूरे अभिज्ञान के साथ
जो जेल के सींखचों को
सरपत की तरह तोड़ देती है
ग्रेनाइट की दीवारें ढहाकर
ध्वंस कर देती हैं
कवि
जाओ
और हथियार गढ़ने में मदद करो!
जाओ इससे पहले
पिछले की तरह यह दशक भी
अतीत के गर्भ में विलीन हो जाये
तुम जनता के पास जाओ!

आलेख

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