महावीर प्लाई में हादसा

उत्तर प्रदेश के जिला बरेली में परसा खेडा क्षेत्र है। यह फैक्टरी एरिया है। यहां लगभग 200 से 250 फैक्टरी होंगी। इसी क्षेत्र में रोड न. 4 पर स्थित महावीर प्लाइबोर्ड है जिसमें लगभग 200-300 मजदूर ठेके के तहत काम करते हैं। इसमें अलग-अलग ठेकेदार हैं। हर रोज नये मजदूरों की भर्ती ठेकेदार करता है लेकिन ईएसआईसी सभी मजदूरों का नहीं बनाता है। कुछ पुराने लोगों का ईएसआईसी बना हुआ है। फैक्टरी में काम करते समय मजदूरों ने ठेली में लिमिट से ज्यादा माल लोड कर दिया और ओवरलोड होने की वजह से ठेली पलट गई और हादसा हो गया। इस हादसे में तीन मजदूरों को चोटें आई हैं। चोट लगने के बाद दो घंटे ठेकेदार ने अस्पताल ले जाने में लगा दिये। तब तक तीनों मजदूर जमीन पर पड़े तड़पते रहे। बहुत जद्दोजहद के बाद ठेकेदार ने मजदूरों को अस्पातल में भर्ती कराया है। तीनों मजदूर पास के गांव जौहरपुर के रहने वाले हैं। अतः ठेकेदार ने तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया है और तीनों में से दो को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गयी है लेकिन एक मजदूर को ज्यादा चोट आई है उसे अभी छुट्टी नहीं दी गई है। उसका इलाज चल रहा है मरीजों के परिजनों का ठेकेदार से संघर्ष जारी है। वह ठेकेदार से मांग कर रहे हैं कि जब तक मजदूर ठीक न हो तब तक मुफ्त इलाज, घर बैठे की सेलरी, बच्चों के भरण पोषण के लिए मुआवजा दिया जाये। -एक पाठक, बरेली

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।