स्थानीय

प्रोटेरियल (हिताची) के मजदूरों का संघर्ष जारी

मानेसर/ प्रोटेरियल (हिताची) के ठेका मजदूर 30 जून से फैक्टरी के अंदर और बाहर प्रबंधन के तानाशाही पूर्ण व्यवहार और अपने मांगपत्र पर कार्यवाही को लेकर बैठे

नगीना कालोनी, पूंजीवादी विकास और मजदूर-मेहनतकश

नगीना कालोनी लालकुआं (नैनीताल) उत्तराखंड रेलवे स्टेशन के समानांतर पूरब की ओर स्थित थी। उत्तराखंड सरकार, केंद्र सरकार, रेलवे, पुलिस-प्रशासन और न्यायालय द्वारा एकजुट होकर न

हल्द्वानी को हिन्दुत्व की प्रयोगशाला बनाते हिंदू सांप्रदायिक संगठन

हल्द्वानी/ हल्द्वानी (उत्तराखंड) क्षेत्रान्तर्गत कमलुवागांजा में साम्प्रदायिक सौहार्द खराब करने और मुस्लिम अल्पसंख्यकों की दुकानों को जबरन बंद करवाने/खाल

बिन्दुखत्ता बचाने व राजस्व ग्राम बनाने को संघर्ष

लालकुंआ/ नगीना कालोनी उजाड़ने के बाद बिन्दुखत्ता का नाम अतिक्रमण की सूची में आने से बीते दिनों बिन्दुखत्ता की जनता काफी आक्रोशित हो गई। नैनीताल जिले की इस सूची में लालकुंआ के बंगाली

11 वर्षीय बच्ची की हत्या-बलात्कार के विरोध में संघर्ष जारी

फरीदाबाद/ समाज में बढ़ती महिला हिंसा व यौन अपराधों की शिकार आम तौर पर मजदूर-मेहनतकश वर्ग की महिलाएं-बच्चियां होती रही हैं। इसी के हिस्से के बतौर 11 अगस्त 2022 को रक्षाबंधन के दिन एक

रेलवे-केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार-स्थानीय प्रशासन और न्यायालय की बेरुखी की भेंट चढ़ी नगीना कालोनी

लालकुआं/ 18 मई 2023 को रेलवे प्रशासन ने स्थानीय पुलिस-प्रशासन के साथ मिलकर लालकुआं, उत्तराखंड की नगीना कालोनी को जमींदोज करना शुरू कर दिया। तोड़-फोड़ की यह प्रक्रिया रेलवे द्वारा पूर

रामनगर में सरकार के बुल्डोजर का खौफ कायमः जन प्रतिरोध जारी

रामनगर/ रामनगर में वन भूमि पर अतिक्रमण के नाम पर लोगों के आशियाने उजाड़ने एवं धार्मिक स्थलों को तोड़ने की सरकार की कोशिशों के ग्रामीणों द्वारा जबरदस्त प्रतिरोध के परिणामस्वरूप वन विभ

आलेख

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

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अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।