पंजाब : मेडिकल कैम्प के अनुभव

/punjab-medical-camp-ke-anubhav

पंजाब की भीषण बाढ़ में पीड़ित जनता को राहत पहुंचाने के लिए 23 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक विभिन्न स्थानों पर आपदा राहत मंच द्वारा मेडिकल कैम्प लगाया गया। आपदा राहत मंच प्रोग्रेसिव मेडिकोज फोरम, नागरिक ‘पाक्षिक’, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, पछास, क्रालोस, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र आदि संगठनों द्वारा गठित संयुक्त मंच है। इसके तहत जगह-जगह आम जनता से बाढ़ में मदद हेतु आर्थिक सहयोग-दवा आदि इकट्ठा की गयी व प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैम्प लगाये गये।  
    
23 से 30 सितम्बर तक अमृतसर के पास रावी के इलाके, जसराउर व गगोमहल और इसके आस-पास के इलाकों में मेडिकल कैम्प में मरीजों को देख लेने के बाद अन्य इलाके में कैम्प लगाने के प्रयास किये गये। इसके लिए सतलज व व्यास नदी से प्रभावित इलाकों का दौरा किया गया। इसके लिए 1 अक्टूबर को जम्हूरी किसान यूनियन के साथियों के साथ कोट बूढ़ा, पट्टी आदि इलाकों में घूमा गया। लेकिन इस दिन कहीं कैम्प लगाने को जगह नहीं मिल सकी। 1 अक्टूबर से बूढ़े बाबा का सालाना मेला जिसमें जगह-जगह लंगर, धार्मिक पदयात्रा आदि शुरू हो गये थे। ऐसे में 2 अक्टूबर को पिद्दरी कलां गांव में कैम्प लगाया गया। पिद्दरी कलां साथी नरभिन्दर जी का गांव है। ‘आपदा राहत मंच’ को मेडिकल कैम्प लगाने में साथी नरभिन्दर का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। यह इलाका बाढ़ आपदा से बहुत अधिक प्रभावित नहीं था। फिर भी यहां त्वचा, इंफेक्शन, बुखार, जुकाम के मरीज काफी संख्या में आये। इसके अलावा कई मरीज ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के भी आये। दो डॉक्टर और दो सहयोगी साथियों ने इस दिन 200 से भी अधिक मरीजों को देखा। यह संख्या बताती है कि शहरों की चकाचौंध से दूर गांव के इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का यहां बुरा हाल है।
    
3 अक्टूबर को सतलज व व्यास नदी के पास के गांव सभरा, फिरोजपुर में मेडिकल कैम्प लगाया गया। जम्हूरी किसान सभा के साथियों ने यहां कैम्प लगाने में सहयोग किया। सभरा से कुछ पहले हरिके से सतलज और व्यास नदी एक ही हो जाते हैं। सभरा गांव के दक्षिण में कुछ इलाके में पानी के साथ रेत आ गयी थी, जिसमें धान और गन्ने की फसल का नुकसान हुआ। खेतों में अभी लगभग 2 से 3 फीट तक रेत भर गयी जिसे अब किसान हटाकर खेतों को वापस उपयोगी बनाने में लगे हैं। यहां लगे मेडिकल कैम्प में भी बुखार, जुकाम, कमजोरी, आंखों में दर्द या इंफेक्शन जैसी समस्याओं के मरीज आये। बूढ़े बाबा का कार्यक्रम सप्ताह भर चलता है। गुरुद्वारे से घोषणा कर, संपर्क के लोगों को सूचित कर, स्कूली बच्चों के जरिये संदेश भेज कर मेडिकल कैम्प की सूचना दी गयी। इसके बाद लगभग 70 लोग मेडिकल कैम्प में आये। 4 अक्टूबर को भी इसी जगह पर मेडिकल कैम्प लगाया गया, जिसमें लगभग 50 लोगों को देखा गया।
    
मेडिकल कैम्प के बाद शाम को नदी के पास के उन इलाकों को देखने गये जहां नदी ने खेतों में रेत भर दी थी। यहीं बातचीत के दौरान पता चला कि पंजाब के ही अन्य इलाकों से काफी मदद मिलती रही है। शुरुआत में जरूरी सामान पहुंचाने से लेकर अब रेत निकालने में डीजल भरकर टै्रक्टरों से सहयोग देने लोग पहुंच रहे हैं। जनता का परस्पर यह सहयोग सरकार की तुलना में बहुत कम संसाधन होने के बावजूद उपयोगी और सराहनीय है। कुछ जगहों पर खराब हो गयी सड़क में मिट्टी-पत्थर भरकर सड़क को काम लायक बनाते हुए ऐसे स्वयंसेवी नौजवानों का दल दिखा।
    
5 अक्टूबर को मेडिकल कैम्प रुकनेवाला गांव में लगाया गया। इस गांव में अभी भी खेतों में पानी भरा हुआ था। यहां कैम्प में लगभग 50 लोगों को देखा गया। यहां भी स्थानीय सहयोगियों ने अपने गांव के अलावा आस-पास के गांवों में भी सूचना पहुंचाई थी। यहां मेडिकल कैम्प के दौरान ही हमने अन्य जगहों पर कैम्प लगाने की संभावना के लिए कुछ संगठनों व व्यक्तियों को सम्पर्क किया। लेकिन कैम्प लगने की स्थिति नहीं बन सकी।
    
आगे कैम्प लगने की संभावना न देख 5 अक्टूबर को तेरह दिन बाद मेडिकल कैम्प का समापन कर दिया।
    
अंत में मेडिकल कैम्प में देखी-सुनी-समझी चीजों के आधार पर कह सकते हैं कि पंजाब में आई इस भीषण बाढ़ ने पंजाब की मेहनतकश जनता को गहरे से प्रभावित किया है। प्रशासनिक लापरवाही और नदियों, नहरों, बांधों आदि की देखभाल के प्रति उपेक्षा ने इस बाढ़ की तबाही को और भी कई गुना बढ़ा दिया। इतने लंबे समय के बाद भी इस आपदा द्वारा दिए गए जख्म अभी भी देखे जा सकते हैं। तरन तारण और फिरोजपुर जिलों के कई गांवों के खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है। फसलें पानी में सड़ रही हैं। रास्तों की हालत जर्जर है। पंजाब के किसानों को खाद-बीज आदि की भी मदद मिली है। आस-पास के किसान एक-दूसरे की मदद अपने ट्रैक्टरों से खेतों को ठीक करने में कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी किसानों की समस्याएं बनी हुई हैं। कुछ समस्या यह भी है कि एक फसल तो बाढ़ की भेंट चढ़ गई। लेकिन दूसरी फसल लगाने के लिए खेत तैयार नहीं हैं। क्योंकि कुछ खेतों में अभी भी पानी है तो कुछ में रेत भरी पड़ी है। रेत से जमीन की उपजाऊ शक्ति भी कम हो जाती है। इस तरह किसानों की समस्याएं लंबे समय तक बनी रहेंगी। 
    
किसानों को अभी तरह-तरह की मदद की जरूरत है। इसमें पंजाब के ही किसान उनकी मदद कर भी रहे हैं। पंजाब की सेवा की ये भावना काबिले तारीफ है। हम उनके सहयोग के इस जज्बे को सलाम करते हैं।
    
‘आपदा राहत मंच’ पंजाब में बाढ़ प्रभावित इलाकों में चले 13 दिन के मेडिकल कैंप में सहयोग देने वाले और इसके लिए आर्थिक और दवा के रूप में मदद देने वाले सभी साथियों का आभार व्यक्त करता है। और उम्मीद करता है कि यदि भविष्य में ऐसी किसी भी आपदा के लिए हम लोग एक साथ खड़े होंगे। 
    
‘आपदा राहत मंच’ ऐसे कैंप जनता के साथ सहयोग की भावना के साथ आयोजित करता है। और मंच देश की मेहनतकश जनता के साथ परेशानी की हर घड़ी में साथ खड़े होने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।        -आपदा राहत मंच
 

आलेख

/capital-dwara-shram-par-kiya-gaya-sabase-bhishan-hamala

मजदूर-कर्मचारी की परिभाषा में विभ्रम पैदा करने एवं प्रशिक्षुओं व कम आय वाले सुपरवाइजरों को मजदूर न माने जाने; साथ ही, फिक्स्ड टर्म एम्प्लायमेंट (FTE) के तहत नये अधिकार विहीन मजदूरों की भर्ती का सीधा असर ट्रेड यूनियनों के आधार पर पड़ेगा, जो कि अब बेहद सीमित हो जायेगा। इस तरह यह संहिता सचेतन ट्रेड यूनियनों के आधार पर हमला करती है। 

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।