सांप कहो, या श्रीमान सांप कहो, वह तुम्हें काट डालेगा

कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि वह अगर सांप को श्रीमान सांप कहेंगे तो वह काटेगा नहीं। भला सांप कब से ऐसा करने लगे कि कोई अगर उसके प्रति सम्मान दिखाये या भद्रता-नम्रता का प्रदर्शन करे तो वह उसे अभय दान दे दे।

कुछ धार्मिक अंधविश्वासी तो सांप को इसलिए ही दूध पिलाने लगते हैं ताकि वह सांप तो क्या सांप परिवार का कोई सदस्य उन्हें कभी भी न काटे। ‘सांप को दूध पिलाना’ मुहावरा अपनी सीख अपने आप कह देता है पर कई लोग सांप को दूध पिलाते ही रहते हैं। उन्हें इस वैज्ञानिक ज्ञान से कोई लेना-देना नहीं है कि सांप दूध नहीं पीते वे तो सीधे अपने जहरीले दांतों से मौत बांटते हैं। 
    
सांप तो फिर भी प्राणी जगत का हिस्सा है जो अपने ‘‘धर्म’’ के अनुसार चलता है। इस सांप से तो मनुष्य निपटने की क्षमता विकसित कर चुका है। काटे गये मनुष्य को इलाज तुरन्त मिल जाये तो उसकी जान भी बच सकती है। परन्तु उन मनुष्य रूप धारी सांपों का क्या करेंगे जिनकी पैदावार भारत में काफी बढ़ गयी है। गजब तो ये है कि इन सांपों का एक मुंह नहीं बल्कि कई-कई मुंह हैं। ये मनुष्य रूप धारी सांप एक ऐसा राष्ट्र बनाना चाहते हैं जहां सांपों का राज चलता हो। कुछ भोले या सांपों के ‘‘धर्म’’ से अनजान मनुष्य सोचते हैं कि वे इन्हें ‘‘श्रीमान सांप!’’ कहेंगे तो उन्हें ये काटेंगे नहीं!

आलेख

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

/piketi-ka-global-justice-project-samraajyavad-ki-pairokari

जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है