श्रमिक संयुक्त मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्यवाही के विरोध में प्रेस वार्ता

Published
Tue, 06/16/2026 - 10:54
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रुद्रपुर/ ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी द्वारा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के कार्यकारी अध्यक्ष एवं इंटरार्क मजदूर संगठन, ऊधमसिंह नगर के अध्यक्ष दलजीत सिंह को एक नोटिस जारी कर उन पर गुंडा एक्ट की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा उन्हें जिला बदर करने की संस्तुति की गई है।
    
बेहद आपत्तिजनक भाषा में लिखे गये इस नोटिस को जारी करने की तारीख 11 मई है, और यह वही समय है जबकि रुद्रपुर-पंतनगर सिडकुल में वेतन बढ़ोत्तरी की मांग के साथ विभिन्न फैक्टरियों के मजदूर हड़ताल-प्रदर्शन कर रहे थे और अभी भी मजदूरों में भारी आक्रोश है, क्योंकि सिडकुल में फैक्टरी मालिक न तो मजदूरों को उत्तराखंड सरकार द्वारा हाल ही में घोषित न्यूनतम वेतन एवं विगत 2 वर्षों का एरियर देने को तैयार हैं और न ही ओवरटाइम का कानूनन डबल भुगतान कर रहे हैं। स्पष्ट है कि मजदूर आंदोलन के भय से प्रशासन द्वारा मजदूर नेता दलजीत सिंह को गुंडा एक्ट का नोटिस जारी किया गया है और इसके पीछे बड़े पैमाने के गैर कानूनी श्रम अभ्यास में लिप्त सिडकुल के पूंजीपति हैं। 
    
मजदूर नेता दलजीत सिंह को जारी किया गया गुंडा एक्ट का नोटिस माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड और माननीय जिला एवं सत्र न्यायालय रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर) के आदेशों की घोर अनदेखी और अवमानना है। क्योंकि दलजीत सिंह के विरुद्ध थाना पंतनगर में पंजीकृत जिन चार मुकदमों (थ्प्त् संख्या -168/2018, थ्प्त् संख्या -229/2018, थ्प्त् संख्या -77/2022 एवं थ्प्त् संख्या -125/2022) को इस नोटिस का आधार बनाया गया है, उनमें से थ्प्त् संख्या -229/2018 में जिला एवं सत्र न्यायालय रुद्रपुर द्वारा दलजीत सिंह को काफी समय पूर्व दोषमुक्त किया जा चुका है। थ्प्त् संख्या -125/2022 पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा काफी समय पूर्व रोक (स्टे) लगाई जा चुकी है। दलजीत सिंह को शेष दो मुकदमों (थ्प्त् संख्या -168/2018 और 77/2022) में भी जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा पूर्व में जमानत दी जा चुकी है, और जिस पर न्यायालय में पुलिस प्रशासन द्वारा कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके अलावा दलजीत सिंह के विरुद्ध वर्ष 2022 के पश्चात् कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं है। उपरोक्त के मद्देनजर प्रशासन की कार्यवाही सीधे-सीधे कानून का मजाक और अधिकारियों की मंशा पर सवालिया निशान है।
    
यहां यह भी गौरतलब है कि इंटरार्क कम्पनी में वेतन समझौता हर वर्ष जुलाई से लागू होता है और जुलाई अब निकट है! यह तथ्य भी साजिश की ओर इशारा करता है। 
    
श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने इस कार्यवाही के विरोध में आहुजा धर्मशाला, रुद्रपुर में प्रेस वार्ता का आयोजन किया। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि दलजीत सिंह एक ऐसे मजदूर नेता हैं जो कि इंटरार्क मजदूर संगठन के साथ मिलकर मजदूर-मेहनतकश जनता के हर आंदोलन में एकजुटता कायम करने को तत्पर रहते हैं। सिडकुल पंतनगर और आस-पास के औद्योगिक केंद्रों में चले मजदूर आंदोलनों के दौरान दलजीत सिंह और उनकी यूनियन द्वारा यथासम्भव सहयोग किया जाता रहा है। ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली के तीनों बार्डरों पर लगे किसानों के पक्के धरने पर साथी दलजीत सिंह अपनी यूनियन के मजदूरों के साथ बस भरकर कई बार पहुंचे थे। मंदसौर हो या कहीं और, किसानों के दमन व नरसंहार की घटनाओं पर उन्होंने मजदूरों के साथ मिलकर हमेशा ही विरोध दर्ज कराया है। चाहे अंकिता भंडारी सरीखे महिला हिंसा व अत्याचार के प्रकारण हों, दलित और अल्पसंख्यक आबादी पर हो रहे जुल्म-अत्याचार की घटनाएं हों, दलजीत सिंह द्वारा अग्रिम कतार में खड़े होकर इनका विरोध किया गया है। क्योंकि ये श्रमिक संयुक्त मोर्चा ऊधमसिंह नगर के कार्यकारी अध्यक्ष हैं क्योंकि मजदूरों का यह साझा मोर्चा हमेशा ही संघर्षरत और पीड़ित मजदूरों की आवाज बुलंद करता रहा है, इसीलिए सिडकुल पंतनगर के कम्पनी मालिकों और धामी सरकार और प्रशासन की आंखों में ये खटकते रहे हैं। इसी द्वेष भावना के तहत दलजीत सिंह के विरुद्ध अन्यायपूर्ण तरीके से गुंडा एक्ट की कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।
    
वक्ताओं ने कहा मानेसर-नोएडा में मजदूर आंदोलन का भारी दमन हो या हरिद्वार सिडकुल में पीपीआईडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललित कुमार को जिला बदर करने की कार्यवाही, हरिद्वार में इंकलाबी मजदूर केंद्र के उपाध्यक्ष पंकज बवाड़ी और कार्यकर्ता जयप्रकाश के विरुद्ध अमल में लाई जा रही गुंडा एक्ट की कार्यवाही हो या रोजगार की मांग कर रहे छात्रों पर बरस रही लाठियां या अब मजदूर नेता दलजीत सिंह के विरुद्ध की जा रही गुंडा एक्ट कार्यवाही... इत्यादि सब पूंजीपतियों के इशारे पर नाच रही केंद्र की मोदी सरकार सहित संघ-भाजपा नीत राज्य सरकारों के फासीवादी दमन चक्र की ही बानगी हैं। देश में उभरते हिंदू राष्ट्र की यही सच्चाई है! 
    
प्रेस वार्ता में श्रमिक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष दिनेश तिवारी, कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के दिनेश चंद्र, सी एस टी यू के केंद्रीय महासचिव मुकुल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट, करोलिया लाइटिंग ईम्प्लाज यूनियन के अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह, इंटरार्क मजदूर संगठन ऊधमसिंह के महामंत्री सौरभ कुमार, इंटरार्क मजदूर संगठन किच्छा के अध्यक्ष हृदयेश कुमार, मंत्री मेटेलिक्स इम्प्लाइज यूनियन के महामंत्री निरंजन लाल, समता सैनिक दल प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह गौतम आदि शामिल थे। 
        -रुद्रपुर संवाददाता

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