फासीवाद

एथेनाल ब्लेंड पेट्रोल: दावे और हकीकत

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आजकल ई-20 पेट्रोल का मामला काफी चर्चा में है। मोदी सरकार ने ई-20 एथेनाल मिश्रित पेट्रोल को ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘किसान कल्याण’ और ‘ऊर्जा सुरक्षा’ जैसे दावों के साथ बिना बहस

ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: सत्ता का केंद्रीकरण

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संसद ने ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। विधेयक लोकसभा में बिना किसी चर्चा के महज 12 मिनट में और राज्यसभा में विपक्ष के वाकआउट के बीच लगभग एक घंटे की सीमित

क्या हवा बदलने वाली है

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अभी ज्यादा कुछ दिन नहीं हुए थे कि भाजपा ने पांच में से तीन राज्यों खासकर प.बंगाल  में बम्पर जीत हासिल की थी। अब इस बात को छोड़ दिया जाए कि भाजपा ने जीत कैसे हासिल की। भाजप

जंतर-मंतर पूरे देश में फैल रहा है!

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जंतर-मंतर पर छात्र-युवा आंदोलन के आगे घुटने टेकते हुए मोदी सरकार ने सोचा था कि एक बार घुटने टेक कर वह छात्रों-युवाओं के उभार की लहर को थाम लेगी और अपनी सरकार को और नुकसान

कश्मीर से दिल्ली पहुंची पैलेट गन

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कश्मीर घाटी में हजारों लोगों को बुरी तरह घायल कर चुकी और सैंकड़ों की आंख की रोशनी छीन चुकी पैलट गन अब देश की राजधानी दिल्ली आ पहुंची है। 20 जुलाई को छात्रों-नौजवानों के सं

ई-20: स्वच्छ ऊर्जा के नाम पर जनता पर हमला

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भारत सरकार 20 प्रतिशत एथेनाल मिश्रित पेट्रोल नीति लागू करने को अपनी बड़ी सफलता बता रही है। सरकार दावा कर रही है कि उसने तय समय सीमा 2030 से पहले ही स्वच्छ ऊर्जा का यह लक्ष

भेड़िया गया, रंगा सियार आ गया

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शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को मजबूरन इस्तीफा देना ही पड़ा। हालांकि श्रीमान जी ने अपने इस्तीफे को बहुत महान उद्देश्यों का वास्ता देते हुए दिया। साफ है, श्रीमान जी बलि

छात्रों-युवाओं की जीत के बाद सरकार व संघी लम्पटों के हमले

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जंतर-मंतर पर छात्रों-युवाओं का संघर्ष इतिहास रच चुका है। किसी के आगे न झुकने का दम्भ भरने वाली मोदी सरकार को छात्रों-युवाओं ने झुकने को मजबूर कर दिया। शिक्षा मंत्री धर्मे

कैसा राष्ट्रवाद? किसका राष्ट्रवाद?

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आज यह स्थापित बात है कि भारत के हिन्दू फासीवादियों ने आजादी की लड़ाई में क्रूर, धूर्त व अत्याचारी ब्रिटिश साम्राज्यवादियों का खुले व छिपे ढंग से समर्थन किया था। ये आजादी की लड़ाई से दूर-दूर रहे। और उन सामंती, राजाओं की गोद में बैठकर ऊंघते-सोते रहे जो अंग्रेजों के पिट्ठू, दलाल व लठैत थे। हेडगेवार, गोलवलकर आदि को अपने घृणित हिन्दू साम्प्रदायिक एजेण्डे को आगे बढ़ाने के लिए पैसा व अन्य संसाधन राजा-महाराजाओं, जमींदारों, सूदखोरों व अंग्रेजों के चाकर व्यापारियों से ही आता था।

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।