मजदूर आवाज

9 जुलाई : आम हड़ताल को सफल बनाओ

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मजदूर वर्ग आबादी में भारत का सबसे बड़ा वर्ग है। पर भारत की राजनीति में इसके मुद्दे इसकी मांगें इसकी भारी आबादी के सापेक्ष कहीं नजर नहीं आते। धर्म-जाति-क्षेत्र के मुद्दे कह

स्पेन में आंदोलनरत हजारों धातु मजदूर

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आजकल स्पेन में हजारों धातु मजदूर आंदोलनरत हैं। कहीं धातु मजदूर हड़ताल पर हैं तो कहीं हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। धातु मजदूरों की यूनियन मजदूरों के संघर्ष को रोकने,

आंध्र प्रदेश : काम के घण्टे 10 करने का फरमान

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आंध्र प्रदेश की चंद्र बाबू नायडू सरकार प्रदेश में निवेश जुटाने और पूंजीपतियों को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसी कड़ी में उसने प्राइवेट सेक्टर में मजदू

ओसामू सुजुकी को पद्म विभूषण-मजदूरों को लाठी-गोली

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भारत सरकार ने वर्ष 2025 के लिए सात लोगों को पद्म विभूषण देने का एलान किया है। इन सात लोगों में सुजुकी मोटर कम्पनी के पूर्व चेयरमैन ओसामू सुजुकी का भी नाम है। राष्ट्रपति द

श्रीलंका : गारमेंट कम्पनी नेक्स्ट ने 1500 नौकरियों को खत्म किया

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ब्रिटेन की गारमेंट कम्पनी नेक्स्ट ने श्रीलंका में स्थित एक प्लांट को बंद करने का फैसला किया है। इस प्लांट के बंद होने से लगभग 1500 मज़दूर बेरोजगार हो जाएंगे। यह प्लांट कटु

रोहिंग्या शरणार्थियों के दमन पर उतारू सरकार

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भारत में फासीवादी मोदी सरकार ने अंधभक्तों की ऐसी फौजी खड़ी की है जिसे सरकार का हर उल्टा-सीधा कदम देश का विकास ही नजर आता है। इस फौज ने सोचने-समझने, तर्क करने की क्षमता खो

पनामा : कटौती कार्यक्रम व साम्राज्यवाद विरोधी प्रदर्शन-हड़ताल

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पनामा के श्रमिक बीते 3 सप्ताह से अधिक समय से संघर्षरत हैं। समय के साथ श्रमिकों के नये समूह संघर्ष में शामिल होकर संघर्ष को व्यापक बनाते जा रहे हैं। श्रमिक सामाजिक सुरक्षा

टैरिफ युद्ध का शिकार बनते चीन के वस्त्र उद्योग के मजदूर

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चीन का वस्त्र व परिधान उद्योग अमेरिका द्वारा चीन पर थोपे गये भारी तटकर से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका प्रभाव इस क्षेत्र के मजदूरों पर पड़ना शुरू भी हो गया है। 

‘युद्धक विमानों के लिए हम पेंशन नहीं छोड़ेंगे’

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बेल्जियम में सरकार एक ओर युद्धक विमानों की खरीद व अन्य सैन्य खर्च बढ़ा रही है वहीं दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों पर मितव्ययिता कार्यक्रम थोप रही है। मजदूरों के वेतन और पेंश

अमेरिकी हस्तक्षेप व पेंशन सुधारों के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल

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कैरेबियाई देश पनामा के ढेरों प्रांतों के मजदूर-कर्मचारी-शिक्षक 28 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ये लोग पेंशन सुधारों व अमेरिका द्वारा पनामा में सैन्य अड्डे कायम क

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।