विविध

मजहब, धर्म और रिलिजियन

आजकल सनातन धर्म की काफी चर्चा है। डी एम के नेता उदयनिधि के सनातन धर्म के उन्मूलन की मांग के बाद हिन्दू फासीवादी इसकी रक्षा में उठ खड़े हुए। उन्होंने सनातन धर्म को हिन्दू ध

भारत एक निगरानी राज्य और आधार की भूमिका

आज जब देश की जनता अपने जीवन के हर मोड़ पर सरकार के द्वारा जांची-परखी, दर्ज और पंजीकृत की जा रही है तो भारत पूरी तरह से एक निगरानी राज्य में तब्दील हो चुका है। चेहरे की पहच

का. नगेन्द्र स्मृति वार्षिक सेमिनार

हर वर्ष की भांति इस वर्ष 8 अक्टूबर 2023 को नागरिक ‘पाक्षिक’ वार्षिक सेमिनार का आयोजन कर रहा है। इस वर्ष यह सेमिनार बरनाला (पंजाब) में आयोजित किया जा रहा है। सेमिनार का विषय आम चुनाव, बढ़ता फासीवादी

भारत बनाम इंडिया

एक बार फिर से देश में भारत बनाम इंडिया की बहस शुरू हो गयी है। पहले भी भारत बनाम इंडिया की बहस चलती रही है लेकिन इस बार सन्दर्भ पहले से अलग है।
    

फासीवादी जुल्म के शिकार परिचालक ने की आत्महत्या

बरेली/ तीन महीने पूर्व दिनांक 3 जून 2023 को बरेली डिपो की जनरथ बस न्च् 32 छछ 0330  बरेली सेटेलाइट बस स्टैण्ड से दिल्ली के कौशाम्बी बस स्टैंड के लिए रवाना

योगी राज में बढ़ता जातीय उत्पीड़न

बरेली/ बरेली जिले की फरीदपुर तहसील के गांव पिपरथरा में दिनांक 11 जुलाई को दलित समुदाय के एक गरीब परिवार के व्यक्ति सचिन दिवाकर की गांव की ही ठाकुर बिरादरी के दबंग युवकों के द्वारा

जी-20 शिखर सम्मेलन के विरोध में विभिन्न जगह प्रदर्शन

9-10 सितम्बर को देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित जी-20 के शिखर सम्मेलन के विरोध में विभिन्न जगहों पर मजदूर, छात्र, महिला एवं जनवादी व सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन आयोजित क

बेलसोनिका मजदूरों का जी-20 के विरोध में पैदल मार्च

गुड़गांव/ दिनांक 9 सितंबर 2023 को बेलसोनिका यूनियन ने मारुति सुजूकी फैक्टरी मानेसर के गेट नंबर 4 से सुबह 10ः00 बजे जी-20 के सम्मेलन स्थल तक अपना तय कार्यक

भगतसिंह होने का मतलब

शहीद भगतसिंह शायद उन चंद व्यक्तियों में होंगे जिनकी लोकप्रियता पीढ़ियों के बदले जाने के बाद भी हर नयी पीढ़ी के बीच बनी रहती है। वे अपनी युवावस्था में भारत की आजादी की लड़ाई

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।