इजरायल-गाजापट्टी संघर्ष किधर जा रहा है!
7 अक्टूबर को गाजापट्टी से हमास संगठन के लड़ाकुओं ने इजरायल पर एक बड़़ा हमला बोल दिया। इस हमले में उन्होंने इजरायल द्वारा खड़ी की गयी बाड़ेबंदी को तोड़ दिया। जमीन से, हवा से और
7 अक्टूबर को गाजापट्टी से हमास संगठन के लड़ाकुओं ने इजरायल पर एक बड़़ा हमला बोल दिया। इस हमले में उन्होंने इजरायल द्वारा खड़ी की गयी बाड़ेबंदी को तोड़ दिया। जमीन से, हवा से और
बिहार राज्य की जाति जनगणना के आंकड़े 2 अक्टूबर 2023 को जारी किए गए। देश के राजनीतिक हलकों में कोहराम मचा हुआ है। राजनीतिक पार्टियां दो खेमों में बंट गई हैं और देश को दो खे
मनकोम्बु सम्बासिवान स्वामीनाथन अथवा एम एस स्वामीनाथन का बीते 28 सितम्बर को निधन हो गया। वे 98 साल के थे। वे भारत में तथाकथित हरित क्रांति के जनक माने जाते थे। पिछले कुछ स
नागरिक पाक्षिक द्वारा आयोजित का. नगेन्द्र स्मृति वार्षिक सेमिनार 2023 में प्रस्तुत सेमिनार पत्र (अंश)
बरनाला, पंजाब/ नागरिक अख़बार द्वारा 8 अक्टूबर के दिन पंजाब के बरनाला में कामरेड नगेंद्र स्मृति सेमिनार का आयोजन किया गया। तर्कशील भवन मे
भारतीय राजनीति खासकर चुनावी राजनीति में जाति हमेशा से महत्वपूर्ण निर्धारक तत्व रही है। जैसे भारतीय समाज में जाति किसी भी व्यक्ति के सामाजिक जीवन को निर्धारित करती रही है
हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित गोरजा इंटरनेशनल कम्पनी है। इस कम्पनी में कम्बल व दरियां बनाने का काम होता है। इस कम्पनी का मालिक नवीन है और इस मालिक के दो पार्टनर हैं।
राजस्थान राइफल एसोसिएशन के कोच द्वारा पिछले कुछ वर्षों में पांच महिला निशानेबाजों के साथ बलात्कार और छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। महिला खिलाड़ियों ने कोच की शिकायत प
गुड़गांव/ बेलसोनिका यूनियन के पंजीकरण को रद्द करने और यूनियन के तीन पदाधिकारी जिनको मार्च महीने में निलंबित किया था, उन्हें बर्खास्त करने के खिलाफ बेलसोनि
पंतनगर/ दिनांक 9 अक्टूबर 2023 को गैरकानूनी तरीके से वेतन कटौती से नाराज विश्वविद्यालय पंतनगर में कार्यरत ठेका मजदूर सुरक्षा गार्डों ने एस.आई.एस.
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।