विविध

जामिया-जेएनयू से हार्वर्ड तक

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अमेरिका में इस समय यह जो हो रहा है वह भारत में पिछले 10 साल से चल रहे विश्वविद्यालय विरोधी अभियान की एक तरह से पुनरावृत्ति है। कहा जा सकता है कि इस मामले में भारत जैसे पिछड़े देश ने अमेरिका जैसे विकसित और आज दुनिया के सबसे ताकतवर देश को रास्ता दिखाया। भारत किसी और मामले में विश्व गुरू बना हो या ना बना हो, पर इस मामले में वह साम्राज्यवादी अमेरिका का गुरू जरूर बन गया है। डोनाल्ड ट्रम्प अपने मित्र मोदी के योग्य शिष्य बन गए। 

अमरीकी धमकियों के साथ ईरान-अमरीका वार्ता

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अमरीकी सरगना ट्रम्प लगातार ईरान को धमकी दे रहे हैं। ट्रम्प इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु बम नहीं बनाने देंगे। ईरान की हुकूमत का कहना है कि वह

मजदूर की मौत पर संघर्ष

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काशीपुर/ जिला उधमसिंह नगर में स्थित काशीपुर शहर जहां छोटे-बड़े कई कारखाने और फैक्टरियां हैं। इन्हीं फैक्टरी ग्रुपों में से एक ग्रुप है जिसका नाम के वी एस

एलके (Elkay) कम्पनी में मजदूरों का शोषण

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फरीदाबाद/ Elkay कम्पनी हरियाणा के फरीदाबाद शहर में प्लाट नम्बर 141, सेक्टर 24 में स्थित है। यह काफी पुरानी कम्पनी है। इसमें कॉपर की हर साइज की तार बनाने का काम होता है। ह

शहीद दिवस पर शहीदों की राह पर चलने का संकल्प लिया

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पंतनगर/ दिनांक 13 अप्रैल 2025 को जलियांवाला बाग हत्याकांड व पंतनगर गोलीकांड की याद में ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा से जुड़ी यूनियनों/संगठनों  द्वारा रामली

हैंड्स ऑफ : हमारे अधिकारों से दूर रहो

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5 अप्रैल को अमेरिका में 50 शहरों में ट्रम्प और मस्क के खिलाफ प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन जहां एक तरफ ट्रम्प द्वारा दुबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जनता पर विभिन्न तरीकों से ब

उच्च न्यायालय द्वारा ठेका मजदूरों को नियमित किए जाने का फैसला

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पंतनगर/ दिनांक 12 मार्च 2025 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल के न्यायधीश रविन्द्र मैथानी की पीठ द्वारा पंतनगर विश्वविद्यालय में पिछले 15-20 वर्षों से

ट्रेड यूनियनें और संघ-भाजपा का खूनी फासीवादी रथ

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इस समय संघ-भाजपा पूरी शिद्दत के साथ देश में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दे रहे हैं। एक के बाद एक साम्प्रदायिक घटनाएं करवाकर संघ-भाजपा अपनी फासीवादी मुहिम

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।