विविध

समझौते के बाद विश्वविद्यालय के मजदूरों का आंदोलन स्थगित

/samajhaute-ke-baad-university-ke-majdooron-ka-andolan-postponed

पंतनगर/ 15 अप्रैल 2025 को ट्रेड संयुक्त मोर्चा से जुड़ी यूनियन पंतनगर कर्मचारी संगठन पंतनगर, वि.वि.श्रमिक कल्याण संघ पंतनगर, राष्ट्रीय सफाई मजदूर कांग्रेस

‘‘बढ़ता फासीवादी खतरा और हमारे कार्यभार’’ विषय पर सेमिनार आयोजित

/badhata-faseevadi-khatara-and-hamare-karybhaar-vishay-par-seminar-ayojit

दिल्ली/ इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा संयुक्त रूप में फासीवाद पर सेम

भोजनमाताओं से अतिरिक्त काम कराना बंद करो

/bhojanmataon-se-extra-work-karana-band-karo

उत्तराखण्ड में भोजनमाताएं रोज-ब-रोज कई समस्याओं से जूझ रही हैं। सरकार एक तरफ ईजा-बैणी महोत्सव मना रही है। उज्ज्वला गैस योजना को घर-घर पहुंचाने की बात कर रही है। लेकिन कई

‘युद्धक विमानों के लिए हम पेंशन नहीं छोड़ेंगे’

/combat-fighters-ke-liye-hum-pension-nahin-chhodeinge

बेल्जियम में सरकार एक ओर युद्धक विमानों की खरीद व अन्य सैन्य खर्च बढ़ा रही है वहीं दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों पर मितव्ययिता कार्यक्रम थोप रही है। मजदूरों के वेतन और पेंश

औद्योगिक कामगारों में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी

/industrial-workers-mein-women-ki-badhati-hissedaari

भारत दुनिया के उन देशों में से है जहां कामगार आबादी में महिलाओं का अनुपात कम है। तब भी, भारत में भी पिछले दशकों में कामगार आबादी में महिलाओं का हिस्सा बढ़ा है। आंगनबाड़ी, आ

अमेरिकी हस्तक्षेप व पेंशन सुधारों के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल

/ameriki-hastakshep-v-pension-sudharon-ke-virodha-mein-indefinite-strike

कैरेबियाई देश पनामा के ढेरों प्रांतों के मजदूर-कर्मचारी-शिक्षक 28 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ये लोग पेंशन सुधारों व अमेरिका द्वारा पनामा में सैन्य अड्डे कायम क

रामा विजन के बहाने

/rama-vijan-ke-bahane

पुरानी बात है, किच्छा में एक फैक्टरी होती थी ‘रामा विजन’, इस फैक्टरी में ब्लैक एण्ड व्हाइट पिक्चर ट्यूब बनती थी। ब्लैक एण्ड व्हाईट टेलीविजन ही उस समय चलन में थे। अभी रंगी

काशी विश्वनाथ फैक्टरी में मजदूरों का शोषण

/kashi-vishwanath-factory-mein-majdooron-ka-shoshan

मेरा नाम कपिल कुमार गौतम है। मैं काशीपुर के हिम्मतपुर वार्ड नं 6 में निवास करता हूं और दो साल से काशीपुर के हिम्मतपुर क्षेत्र में स्थित कम्पनी काशी विश्वनाथ में काम करता

पहलगाम आतंकी हमले से निकलने वाले सबक

/pahalgaam-terror-attack-se-nikalane-vale-sabak

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान जैसे युद्ध के मुहाने पर पहुंच गये हैं। संधियां निलम्बित की जा रही हैं और व्यापार से लेकर लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगाये जा

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।