विविध

मारुति सुजुकी मजदूरों के धरना स्थल पर स्मरण सभा

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मारुति सुजुकी स्ट्रगल कमेटी के नेतृत्वकारी मजदूर प्रदीप, जो धरना स्थल पर ही रह रहे थे, की 15 नवंबर को सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। 23 नवंबर को मारुति सुजुकी मजदूरों के धरन

एक बार फिर सभ्यता और बर्बरता

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कहा जाता है कि लोगों को वैसी ही सरकार मिलती है जिसके वे लायक होते हैं। इसी का दूसरा रूप यह है कि लोगों के वैसे ही नायक होते हैं जैसा कि लोग खुद होते हैं। लोग भीतर से जैसे होते हैं, उनका नायक बाहर से वैसा ही होता है। इंसान ने अपने ईश्वर की अपने ही रूप में कल्पना की। इसी तरह नायक भी लोगों के अंतर्मन के मूर्त रूप होते हैं। यदि मोदी, ट्रंप या नेतन्याहू नायक हैं तो इसलिए कि उनके समर्थक भी भीतर से वैसे ही हैं। मोदी, ट्रंप और नेतन्याहू का मानव द्वेष, खून-पिपासा और सत्ता के लिए कुछ भी कर गुजरने की प्रवृत्ति लोगों की इसी तरह की भावनाओं की अभिव्यक्ति मात्र है। 

डाल्फिन मजदूरों का आमरण अनशन समाप्त

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पंतनगर/ डाल्फिन मजदूरों का आमरण अनशन और धरना 26 नवम्बर 2024 को भाजपा प्रदेश मंत्री विकास शर्मा द्वारा मीडिया के समक्ष अनशनकारी महिलाओं सहित सभी मजदूरों क

उन्नीस सौ पच्चीस

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उन्नीस सौ पच्चीस में सिर्फ ऐसी घटनाएं व ऐसे संगठन ही जन्म नहीं ले रहे थे जो भारत के भविष्य की दिशा तय रहे थे बल्कि ऐसे व्यक्ति भी जन्म ले रहे थे जिन्होंने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपना व्यापक अच्छा-बुरा प्रभाव छोड़ा। 9 जुलाई को एक बड़े फिल्म अभिनेता-निर्देशक गुरूदत्त का जन्म हुआ जिनकी बनाई फिल्में विश्व क्लासिक में शामिल हो गईं। 15 जुलाई को एक बड़े नाट्यकर्मी बादल सागर का जन्म हुआ तो 7 अगस्त को एम.एस.स्वामीनाथन नाम के पूंजीवादी कृषि वैज्ञानिक का जन्म हुआ। ऐसे अनेकोनेक व्यक्तियों की चर्चा की जा सकती है। ये व्यक्ति अपने युग की पैदाइश थे और ये आज के भारत की तस्वीर के एक हिस्से हैं। 

ग्रीस में आम हड़ताल

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20 नवंबर को ग्रीस में सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और मजदूरों ने 24 घंटे की आम हड़ताल कर अपने वेतन को बढ़ाने की मांग की। यह हड़ताल उस समय आयोजित की गयी है जब ग्रीस

नकली नोट आखिर आते कहां से हैं ?

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संसद में एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया 2018-19 के 2,18,650 लाख (संख्या में) 500 रुपये के नकली नोटों के मुकाबले 2022-23 में 9,11,

तुर्की में कोयला खान के मजदूरों की हड़ताल

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20 नवंबर से तुर्की की राजधानी अंकारा के निहलानी जिले में स्थित कोयला खान के मजदूरों ने हड़ताल कर दी। हड़ताल की शुरुवात में 500 मज़दूरों ने अपने आपको खान के अंदर ही बंद कर लि

पितृसत्ता

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पितृसत्ता की जंजीरों में बंधी,
सपनों की दुनिया से अंधी।
आसमान छूने की ख्वाहिश,
धरती पर गिराई जाती हैं।

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।