विविध

विधायक, प्रदेश मंत्री की वादखिलाफी से डालफिन मजदूरों में आक्रोश

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पंतनगर/ 37 दिनों तक आमरण अनशन पर रहने के बाद डालफिन के मजदूरों का संघर्ष भाजपा के प्रदेश मंत्री विकास शर्मा के आश्वासन के पश्चात 26 नवम्बर को समाप्त हो ग

न्यूजीलैंड में नर्सों की हड़ताल

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3 दिसंबर को न्यूजीलैंड में 36,000 नर्सों, सहायकों और मिडवाइव्स ने आठ घंटे की हड़ताल कर अपने वेतन को बढ़ाने की मांग की। साथ ही उनकी मांग खाली पड़े पदों को भरने की भी है। पिछल

महिला मजदूरों की मांगों को लेकर प्रदर्शन-ज्ञापन, सभा

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9 दिसम्बर 2024 को महिला मजदूरों की मांगों को लेकर श्रम विभाग, रोशनाबाद (हरिद्वार) पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नेतृत्व में प्रदर्शन किय गया। सिडकुल (हरिद्वार) में महिला मज

ईएसआईसी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए धरना-प्रदर्शन

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फरीदाबाद/ हरियाणा के ईएसआईसी मेडिकल कालेज अस्पताल व डिस्पेंसरियों में इलाज के नाम पर कभी पूरी दवाइयां नहीं तो कभी डाक्टर नहीं, कभी जांच नहीं जैसे मामलों

पूरे माह काम, समय से वेतन, सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग

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पंतनगर/ दिनांक 2 दिसंबर 2024 को आंदोलनरत फसल अनुसंधान केन्द्र के मजदूरों द्वारा सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर तिलक राज बेहड़, क्षेत्रीय विधायक किच्छा पंतनगर

एक कानून की शवयात्रा निकालते संघी

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बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद 1991 में एक कानून पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम बना था। इस कानून के तहत प्रावधान किया गया था कि देश में सभी धार्मिक संरचनायें उसी रूप में

बांग्लादेशी लोगों का भारत में उत्पीड़न

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लगता है भारत की संघी सरकार ने बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन जमात-ए-इस्लामी से हाथ मिला लिया है। मानो दोनों के बीच करार हो गया हो कि तुम बांग्लादेश में हिन्दुओं क

इंजीनियर की आत्महत्या पर पुरुषवादी आक्रोश

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बीते दिनों बंगलुरू स्थित एक फर्म में ए आई इंजीनियर अतुल सुभाष द्वारा पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का मामला भारतीय मीडिया में छाया रहा। अतुल सुभाष ने अपने 24 पेज के आ

इजरायल-लेबनान युद्ध विराम समझौता- स्थायी समाधान नहीं है

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इजरायल की यहूदी नस्लवादी हुकूमत और उसके अंदर धुर दक्षिणपंथी ताकतें गाजापट्टी से फिलिस्तीनियों का सफाया करना चाहती हैं। उनके इस अभियान में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन सबसे बड़ी बाधा हैं। वे स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र के लिए अपना संघर्ष चला रहे हैं। इजरायल की ये धुर दक्षिणपंथी ताकतें यह कह रही हैं कि गाजापट्टी से फिलिस्तीनियों को स्वतः ही बाहर जाने के लिए कहा जायेगा। नेतन्याहू और धुर दक्षिणपंथी इस मामले में एक हैं कि वे गाजापट्टी से फिलिस्तीनियों को बाहर करना चाहते हैं और इसीलिए वे नरसंहार और व्यापक विनाश का अभियान चला रहे हैं। 

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।