विविध

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ का तीसरा द्विवार्षिक सम्मेलन

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ का तीसरा द्विवार्षिक सम्मेलन 28, 29 फरवरी 2024 को गांधी प्रेक्षागृह लखनऊ में आयोजित किया गया। सम्मेलन में बिज

साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ हल्द्वानी बुद्धपार्क में जनसम्मेलन

हल्द्वानी/ बनभूलपुरा की दुर्भावनापूर्ण घटना के बाद बिगड़ी कानून व्यवस्था व जनता का पुलिसिया उत्पीड़न बंद करने व शान्ति पूर्ण माहौल बनाने के लिए राज्य के सा

जोशो खरोश से मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस

8 मार्च को हर साल महिलाओं के संघर्षों के दिवस के रूप में मनाया जाता है। बीसवीं सदी के शुरूवात से ही महिलाओं के राजनीतिक अधिकार तथा कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए महि

श्रीलंका : स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल की घोषणा

श्रीलंका में एक बार फिर स्वास्थ्य कर्मचारी अपने संयुक्त बैनर हेल्थ ट्रेड यूनियन एलायंस के बैनर तले 19 मार्च को हड़ताल करेंगे। यह हड़ताल वेतन-भत्तों को बढ़ाने के लिए होगी। इस

खुश हो जाइये ! अब अपन गरीब नहीं रहे !

इंदिरा गांधी ने 70 के दशक में जब गरीबी हटाओ का नारा दिया था तो देश के सारे गरीब-मजलूम खुश हो गये थे कि चलो अब हमारे दिन बहुरेंगे। पर इंदिरा गांधी को गरीबी हटाने का असली फ

किसान आंदोलन और विश्व व्यापार संगठन

फरवरी माह के मध्य से किसान आंदोलन फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है। 13 फरवरी से ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान के तहत हजारों किसान पंजाब-हरियाणा सीमा पर डटे हुए हैं। हरियाणा पुलिस

नंधौर रेंज के खनन मजदूरों का बदहाल जीवन

उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में नंधौर रेंज स्थित है जो कि संरक्षित क्षेत्र है। यहां से नंधौर नदी निकलती है। यह नदी अपने साथ कंकड़, पत्थर और रेत बहाकर लाती है जिसका खनन सरका

जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग के साथ जन सम्मेलन का आयोजन

जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग के साथ 18 फरवरी को ग्राम कानिया (रामनगर) में आयोजित जन सम्मेलन में सैंकड़ों की तादात में ग्रामीणों ने भागीदारी की। सम्मेलन से

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।