गाजा पर यूरोप के देशों का पाखंड और अमेरिकी निर्लज्जता

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गाजा में जारी नरसंहार पर यूरोप के देशों में हो रहे प्रदर्शनों के दबाव में इन देशों की सरकारें भले ही इसराइल का विरोध करने पर मज़बूर हो रही हैं। भले ही, ये फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता देने सम्बंधी बयान भी जारी कर रही हैं। लेकिन असल में ये इजराइल पर किसी भी ठोस कार्रवाही से बच रही हैं।
    
हाल ही में डेनमार्क की राजधानी कोपेन्हेगन में संपन्न हुई यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों की बैठक में इनका ये पाखंड उजागर हुआ। इस बैठक में गाज़ा के मसले पर इसराइल पर कार्रवाही करने के मामले में इन देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई और बैठक बेनतीजा समाप्त हो गई। यहां तक कि यूरोपीय यूनियन शोध के एक कार्यक्रम के लिये इसराइल को जो फंड देता है उसे रोकने के लिये आया एक प्रस्ताव भी इस बैठक में ख़ारिज हो गया।

दूसरी ओर अमेरिका ने पूरी निर्लज्जता के साथ फिलिस्तीनी  प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास सहित 80 लोगों के अमेरिका आने के वीजा पर ही रोक लगा दी है, ताकि संयुक्त राष्ट्र संघ की न्यूयोर्क में आयोजित हो रही आम सभा में वे भागीदारी न कर सकें। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा के तय कार्यक्रम के अनुरूप 22 सितम्बर को ‘‘दो राज्य समाधान’’ के तहत ‘फिलिस्तीन के मसले के शांतिपूर्ण समाधान’ हेतु एक उच्च स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन होना है। यूरोप के कुछ देशों, जिसमें फ्रांस भी शामिल है, ने अपने देशों की जनता के भारी दबाव में इस सम्मेलन में फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देने की बात कही है। फिलहाल फिलिस्तीनी प्राधिकरण संयुक्त राष्ट्र संघ का पर्यवेक्षक सदस्य है।
    
इस बीच 12 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देने का प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ। 193 देशों में 142 ने पक्ष में 10 ने विरोध में मत दिया। जबकि 12 देशों ने अनुपस्थित रहने का विकल्प चुना। पक्ष में मत देने वालों में रूस-चीन-भारत-फ्रांस-जर्मनी-अरब के देश शामिल रहे। पर इस प्रस्ताव की कोई कानूनी हैसियत नहीं है। 142 देश फिलिस्तीन के पक्ष में मत देने से आगे बढ़कर कोई वास्तविक कार्यवाही करने को तैयार नहीं हैं। 
    
इसके अलावा गाजा में पिछले करीब दो साल से जारी इजराइली बमबारी में घायल होने वाले जिन फिलिस्तीनी बच्चों को कुछ संस्थाओं द्वारा इलाज हेतु अमेरिका भेजा जा रहा था, अमेरिका ने एक फैसले के तहत इस पर भी रोक लगा दी है। इस दौरान इजरायल द्वारा कतर में हमास के नेताओं पर हमला किया गया। यमन में हौथी नेताओं की हत्या के बाद भी इजरायली हमले जारी हैं। 
    
संयुक्त राष्ट्र संघ गाजा में भुखमरी फैलने की बात कर रहा है और इसके लिये वहां राहत सामग्री पहुंचाने में इजराइल द्वारा खड़ी की जा रही बाधाओं को जिम्मेदार ठहरा रहा है। लेकिन इजराइल संयुक्त राष्ट्र संघ को अपने ठेंगे पर रखे हुये है। वह लगातार गाजा में नरसंहार रच रहा है क्योंकि अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी साम्राज्यवादी उसके साथ खड़े हैं। ऐसे में नख-दंत विहीन संयुक्त राष्ट्र संघ का 22 सितम्बर को फिलिस्तीन के मसले पर होने वाला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी असल में सिर्फ कोरी घोषणायें और बयानबाजी ही करेगा। फिलिस्तीन को आजादी अपने संघर्ष के बल पर ही मिलेगी और फिलिस्तीन की बहादुर जनता एक दिन इसे हासिल करके रहेगी।
 

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