उच्च न्यायालय द्वारा ठेका मजदूरों को नियमित किए जाने का फैसला

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पंतनगर/ दिनांक 12 मार्च 2025 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल के न्यायधीश रविन्द्र मैथानी की पीठ द्वारा पंतनगर विश्वविद्यालय में पिछले 15-20 वर्षों से लगातार कार्यरत लगभग 50 ठेका मजदूरों का नियमितीकरण करने का आदेश जारी किया गया है।
    
पंतनगर विश्वविद्यालय में स्थाई प्रकृति के कामों में पिछले 15-20 सालों से ठेका प्रथा के तहत करीब 2800 ठेका मजदूर शोषण-उत्पीड़न की चक्की में पिस रहे हैं। ठेका मजदूरों को नियमितीकरण तो दूर श्रम नियमों द्वारा देय बोनस, ग्रेच्युटी, अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है।
    
पंतनगर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हर वर्ष मानव आपूर्ति हेतु ठेकेदारों को तैनात किया जाता है। हर वर्ष एजेंसी/ठेकेदार बदलते रहते हैं परंतु मजदूर नहीं बदलते। वही मजदूर एक एजेंसी से दूसरी एजेंसी में वर्षों से लगातार कार्यरत हैं। जिन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन अपने मजदूर नहीं मानता बल्कि ठेकेदार के कर्मचारी मानता रहा है। इन मजदूरों को ठेकेदार के कर्मचारी कहकर श्रम कानूनों द्वारा देय मूलभूत सुविधाओं से भी किनाराकसी करता रहा है। ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर गैर कानूनी ठेका प्रथा खत्म कर ठेका मजदूरों को श्रम नियमों द्वारा देय मूलभूत सुविधाएं एवं नियमितीकरण के लिए संघर्षरत रही है। इसी की पहली कड़ी में ठेका मजदूर कल्याण समिति के कार्यकर्ताओं/सदस्यों द्वारा चुनौती देते हुए 50 ठेका मजदूरों का नियमितीकरण किए जाने हेतु उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में मुकदमा दायर किया गया था। जिसमें कुलपति विश्वविद्यालय पंतनगर एवं उत्तराखंड सरकार को पार्टी बनाया गया था। उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल के वरिष्ठ अधिवक्ता हरेंद्र बेलबाल द्वारा केस की मजबूती से पैरवी की गई। उच्च न्यायालय द्वारा उत्तराखंड शासनादेश विनियमितीकरण नियमावली वर्ष 2013 व उत्तराखंड हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश का 06 जनवरी 2025 का फैसला एवं भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के तमाम फैसलों को आधार बनाकर 12 मार्च 2025 को पंतनगर में बाह्य सेवादाता के माध्यम से कार्यरत ठेका मजदूरों का नियमितीकरण किए जाने के लिए फैसला दिया गया। 
    
न्यायालय द्वारा जारी फैसले में ठेका मजदूरों को उनकी नियुक्ति तिथि से दैनिक वेतनभोगी कर्मी माना गया है। और नियुक्ति तिथि से नियमितीकरण किए जाने, नियमित कार्मिक के हित लाभ दिए जाने का आदेश जारी किया गया है। विश्वविद्यालय के उक्त 50 ठेका मजदूर उच्च न्यायालय का आदेश संलग्न कर कुलपति विश्वविद्यालय पंतनगर एवं प्रमुख सचिव कृषि उत्तराखंड शासन को नियमितीकरण किए जाने हेतु ज्ञापन भेजने की तैयारी कर रहे हैं। उक्त फैसले से वर्षां से लगातार कार्यरत 2800 ठेका मजदूरों में खुशी की लहर, आशा की किरणें जगी हैं। यह फैसला देश के अन्य प्रदेशों के सरकारी संस्थाओं के ठेका मजदूरों के लिए भी नजीर बनेगा। मजदूरों को राहत मिलेगी। 
    
ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर अपने स्थापना समय से ही ठेका मजदूरों के नियमितीकरण, मूलभूत सुविधाओं के लिए लगातार संघर्षरत रही है। पंतनगर के ठेका मजदूरों को ई एस आई सुविधा उपलब्ध कराने के संघर्ष से भारत सरकार को पंतनगर में ई एस आई सुविधा उपलब्ध कराने का शासनादेश जारी करना पड़ा था। पंतनगर विश्वविद्यालय पंतनगर द्वारा ई एस आई सुविधा  लागू नहीं करने पर ठेका मजदूर कल्याण समिति द्वारा वर्ष 2018 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में मुकदमा दायर किया गया था। जिसके बाद शासन प्रशासन को वर्ष 2021 में पंतनगर के ठेका मजदूरों को ई एस आई सुविधा लागू करने को बाध्य होना पड़ा।     
    
ठेका मजदूरों के इस संघर्ष में इंकलाबी मजदूर केन्द्र हर कदम पर मार्गदर्शन करता रहा। अभी मजदूरों को न्यायालय से मिले न्याय को व्यवहार में उतारने व बाकी मजदूरों को नियमित कराने की लम्बी लड़ाई लड़नी है। मजदूरों को एकजुटता मजबूत बनाते हुए सड़क व अदालत सभी जगह मजबूती से लड़ने की जरूरत है। 
        -पंतनगर संवाददाता

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