पंतनगर वि.वि. : परियोजना शिक्षकों पर शासन का हमला
पंतनगर/ उत्तराखंड शासन के 4 जुलाई 2023 के आदेशानुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर 34 शिक्षकों (जो 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थे) को एक झटके में
पंतनगर/ उत्तराखंड शासन के 4 जुलाई 2023 के आदेशानुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी कर 34 शिक्षकों (जो 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थे) को एक झटके में
9 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसे क्रियान्वित करते हुए संयुक्त किसान मोर्च
मजदूर वर्ग के शोषण-उत्पीड़न के मामले में कांग्रेस व भाजपा सरकारें एक सी हैं। इस बात को हाल में ही कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने अपने एक कदम से साबित कर दिया। फरवरी 2023 में
5 जुलाई 2023 से हरियाणा प्रदेश के सभी 22 जिलों के लगभग सभी लिपिक अपने-अपने जिला मुख्यालयों में राज्य स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ चुके हैं। यहां हड़ताल लिपिकों ने अचा
बीते दिनों राजस्थान सरकार ने प्लेटफार्म आधारित गिग मजदूरों के कल्याण के नाम पर एक बिल पारित किया। इसे ‘प्लेटफार्म आधारित गिग कर्मकार (पंजीकरण व वेलफेयर) बिल 2023’ नाम दिय
दो साल के लम्बे संघर्ष के बाद अंततः मोहाली, चंडीगढ़ स्थित फैक्टरी फ्रीडन वर्ग में ठेका मजदूरों ने अपनी यूनियन गठित करने में सफलता हासिल कर ली। उनकी यूनियन ‘‘F n i (कान्ट्र
प्रोटेरिअल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (हिताची), प्लाट नं 94-95, सेक्टर-8, आईएमटी मानेसर के ठेका मज़दूरों का 23 दिन की जुझारू हड़ताल के बाद समझौता सम्पन्न हुआ। 22 जुलाई 2023 को
ओ ई सी डी द्वारा हाल में रोजगार संदर्भी रिपोर्ट जारी की गयी। इस रिपोर्ट ने बढ़ती महंगाई के पीछे बढ़ती मजदूरी का तर्क देने वाले पूंजीवादी अर्थशास्त्रियों की बोलती बंद कर दी
नगीना कालोनी लालकुआं (नैनीताल) उत्तराखंड रेलवे स्टेशन के समानांतर पूरब की ओर स्थित थी। उत्तराखंड सरकार, केंद्र सरकार, रेलवे, पुलिस-प्रशासन और न्यायालय द्वारा एकजुट होकर न
मानेसर/ प्रोटेरियल (हिताची) के ठेका मजदूर 30 जून से फैक्टरी के अंदर और बाहर प्रबंधन के तानाशाही पूर्ण व्यवहार और अपने मांगपत्र पर कार्यवाही को लेकर बैठे
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।