‘‘..अहो रूपं, अहो ध्वनिः’’
11 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी के नाम से देश के प्रमुख अखबारों में एक लेख छपा। लेख संघ प्रमुख मोहन भागवत के 75वें जन्मदिवस के मौके पर था। मोदी जी ने मोहन भागवत की प्रशंस
11 सितम्बर को प्रधानमंत्री मोदी के नाम से देश के प्रमुख अखबारों में एक लेख छपा। लेख संघ प्रमुख मोहन भागवत के 75वें जन्मदिवस के मौके पर था। मोदी जी ने मोहन भागवत की प्रशंस
राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस दानव को संत का जामा पहनाने की कोशिश की गयी। ‘‘संघ की यात्रा के 100 वर्ष - नए क्षितिज’’ नामक तीन दिवसीय कार्यक
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आर एस एस) को अपने जन्म शताब्दी वर्ष में एक काम यह करना चाहिए कि उन्हें अपना नाम, भारत में बदल देना चाहिए। उन्हें अपने नाम के आगे से ‘राष्ट्रीय’
कर्नाटक में धर्मस्थला के आस-पास कत्ल करके सैकड़ों लाशें दफनाई गई हैं। इस बात के खुलासे ने लोगों का दिल दहला दिया है। कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में धर्मस्थला नामक शिव का
उ.प्र.-उत्तराखण्ड के कई जिलों में गांवों-शहरों में लोग रात-रात भर जाग रहे हैं। वे इस खौफ में जाग रहे हैं कि कोई ‘द्रोण चोर’ उनके यहां डकैती न डाल दे। लोग हाथों में डण्डे
आम गरीब नागरिकों के घरों और दुकानों को अलग-अलग तर्कों से बुलडोजर के जरिए रौंदने का अभियान जारी है। उत्तर प्रदेश में योगी राज से होता हुआ यह बुलडोजर अभियान अलग-अलग भाजपाई
मोदी सरकार के आगमन के बाद देश में साम्प्रदायिक उन्माद में गुणात्मक बढ़ोत्तरी हुई है। यह साम्प्रदायिकता खासकर मुसलमानों को निशाने पर लेकर हुई है। हालांकि दलित, आदिवासी व मह
पिछले दिनों मुंबई उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो अलग-अलग मामलों में दोष सिद्ध न होने के कारण आरोपियों को बरी किया। 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों में मुंबई उच्च
बिहार चुनाव में मोदी सरकार अपने फासीवादी एजेंडे को चुनाव आयोग के जरिए आगे बढ़ा रही है। नागरिकता संशोधन कानून के जरिए तीन पड़ोसी देशों के गैर मुसलमानों को भारत की नागरिकता द
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।