शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर उतरी भोजनमाताएं

Published
Mon, 02/16/2026 - 06:00
/sahoshan-v-utpidan-ke-khilaaf-sadakon-par-utari-bhojanamataen

2 फरवरी को उत्तराखंड की भोजनमाताओं ने राज्यव्यापी हड़ताल की। यह हड़ताल भोजनमाताओं के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने, उनको स्थाई करने व शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ थी। भोजनमाताएं लंबे समय से उत्तराखंड सरकार से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मांग करती रही हैं लेकिन उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं की मांगों को लगातार अनसुना करती रही है। तब मजबूर होकर भोजनमाताओं ने हड़ताल करने का फैसला किया। हड़ताल में उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों व शहरों से भोजनमाताएं शामिल हुईं।

देहरादूनः देहरादून के दीनदयाल पार्क में भोजनमाताओं ने प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले धरना व सभा की। धरने में देहरादून, डोईवाला व नेपाली फार्म की भोजनमाताएं शामिल हुईं। सभा में वक्ताओं ने कहा कि भोजनमाताएं 20-21 सालों से सरकारी, अर्ध सरकारी विद्यालयों में भोजन बनाने का काम कर रही हैं। परंतु, अत्यंत खेद की बात है कि इतने वर्ष कार्य करने के बाद भी उनकी स्थिति आज भी अत्यंत असुरक्षित, अस्थिर एवं उपेक्षित बनी हुई है।

हरिद्वारः हरिद्वार जिले के 6 ब्लॉकों की भोजनमाताएं प्रदर्शन में शामिल रहीं। जिले की भोजनमाताएं स्कूलों में हड़ताल कर विकास भवन रोशनाबाद पर एकत्रित होकर डी एम के यहां धरने पर बैठीं तथा सभा की। सभा के बाद डी एम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के सामने भोजनमाताएं अपनी समस्याएं एवं मांग अलग-अलग वक्त पर रखती रही हैं। मगर अफसोस है कि उनकी मांगों को लगातार अनसुना किया जा रहा है। भोजनमाताओं का वेतन पिछले 4 सालों से 3000 रुपये पर ही अटका हुआ है। यह राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के एक तिहाई से भी कम है।

काशीपुरः पंत पार्क काशीपुर में भोजनमाताओं ने एकत्रित होकर धरना व सभा की। उसके बाद एस डी एम कार्यालय तक जुलूस निकाल कर एस डी एम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की हजारों मिड-डे-मील वर्कर (भोजनमाता) वर्षों से अल्प मानदेय, अतिरिक्त काम के बोझ, मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न और प्रशासनिक उपेक्षा को झेल रही हैं। इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र के कार्यकर्ताओं ने भोजनमाताओं की हड़ताल का समर्थन किया।

रामनगरः रामनगर में लखनपुर चुंगी पर भोजनमाताएं एकत्रित हुईं। वहां से जुलूस निकाल कर एस डी एम कार्यालय तक गयीं व सभा की। सभा में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने भोजन ‘‘माता’’ शब्द दिया और ‘‘माता’’ शब्द के ‘‘सम्मान’’ के नाम पर उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं का शोषण उत्पीड़न कर रही है।

हल्द्वानीः बुद्ध पार्क हल्द्वानी हल्द्वानी-लालकुंआ की भोजनमाताओं ने एकत्रित होकर धरना व सभा की। बाद में जुलूस निकालकर जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय गए व जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कई विद्यालयों में गैस चूल्हा, पानी व मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। स्कूल खुलने से लेकर बंद होने तक भोजनमाताओं को स्कूलों में रोका जाता है और विरोध करने पर काम से हटाने की धमकी व अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं।

नैनीतालः नैनीताल में तल्लीताल डांट पर भोजनमाताओं ने एकत्रित होकर धरना व सभा की। बाद में कुमाऊं कमिश्नर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्कूलों में भोजनमाताओं से उनके कार्यक्षेत्र से बाहर स्कूल के कमरों व मैदान की सफाई, चौकीदारी, माली और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों आदि कार्य कराए जा रहे हैं।

कोटाबागः खंड शिक्षा अधिकारी कोटाबाग के कार्यालय पर भोजनमाताएं एकत्रित होकर धरना व सभा की। उसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित 5 हजार का मानदेय आज तक लागू नहीं हुआ है।

रुद्रपुरः पंतनगर, किच्छा व रुद्रपुर की भोजनमाताएं डी एम कार्यालय रुद्रपुर में एकत्रित हुईं। वहां पर धरना व सभा की गई व डी एम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि भोजनमाताओं को कोई छुट्टी नहीं दी जाती है। कुछ मामलों में भोजनमाताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार भी सामने आया है।

पिथौरागढ़ः टकाना पिथौरागढ़ के रामलीला मैदान में भोजनमाताएं एकत्रित हुईं व धरना तथा सभा की। सभा में वक्ताओं ने कहा कि एक ओर प्रदेश की 25 हजार भोजनमाताओं की हालत इतनी बुरी है। वहीं दूसरी ओर हम गरीबों के प्रतिनिधियों (सांसद, विधायकों) के वेतन-भत्ते बढ़ते जा रहे हैं। 2018 से अब तक उत्तराखंड सरकार ने विधायकों के पेंशन, वेतन-भत्तों में दो से तीन बार बढ़ोत्तरी कर दी है। 

चंपावतः पाटी ब्लॉक मुख्यालय पर भोजनमाताओं ने एकत्रित होकर धरना दिया व उप शिक्षा अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ सरकार कहती है कि ‘एक देश, एक राज्य में दो कानून नहीं चलेंगे’ मगर वहीं दूसरी ओर सरकार न्यूनतम वेतनमान में इतना भारी फर्क कर रही है। इतनी भयावह बढ़ती महंगाई के बीच मजदूर-मेहनतकश जनता का अस्तित्व खतरे में है। 

अल्मोड़ाः स्याल्दे तहसील, अल्मोड़ा में भोजनमाताएं एकत्रित हुईं। एस डी एम कार्यालय पर धरना व सभा की। इसके बाद एस डी एम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि अगर हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तब भोजनमाताएं और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगी। जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
    इस हड़ताल को प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, रुद्रपुर-हरिद्वार क्षेत्र की विभिन्न मजदूर यूनियनों ने जगह-जगह भागीदारी कर समर्थन दिया।  
        -विशेष संवाददाता

आलेख

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि